Mera Guzara nahin hota teri tasbir se-......मेरा गुजारा नहीं होता तेरी तस्बीर से
मेरा अब ग़ुज़ारा नहीं होता तेरी तस्वीर से,
चलो न मिलते हैं हम कहीं दूर इस शहर से।
क्यों इतनी तक़ल्लूफ़ी है तेरे अंदाज़ में,
चलो न करते हैं हम कहीं गुफ्तगू एतबार से।
क्यों इतनी आवारगी है इस सावन में,
चलो न भींगते हैं हम कहीं बारिश में सुकूं से।
क्या है ना जाने वहम तेरे मेरे दरमियाँ में,
चलो न छोड़ते हैं सारी हिचकिचाहटें रहें क्यों हम परेशां से।
क्यों इतनी बे-परवाहियाँ हैं इन हवाओं में,
चलो न उड़ते हैं हम कहीं आसमां में इत्मीनान से।
क्या है ना जाने रम्ज़ दिल-ए-समंदर की गहराइयों में,
चलो न ढूंढ़ते हैं हम कोई इश्क़ का मोती सागर की सत्ह से।
क्यों इतनी मुख़्तलिफ़ हैं हमारी राहें इस सफ़र में,
चलो न निकलते हैं हम कहीं सफ़र पर इब्तिदा से।
क्या है ना जाने नज़ारा इस दौर का सुबह-ओ-शाम में
चलो न करते हैं हम नज़ारा इस दुनिया का किसी साहिल से।
—𝓘𝓻𝓯𝓪𝓷¬🖤
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Bahut hashin hai gav- बहुत हसीन है मेरा गांव
Dil bekarar sahi udas nhi- दिल बेकरार सही उदास नहीं
Bas baith jau aur tera mera hath ho- बस बैठ जाऊ और तेरा मेरा हाथ हो
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Jangle ka sukha darkat-जंगल का सूखा दरखत

Nice bhaiya
ReplyDeleteDgnnk
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