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CJP ने उठाया Protestors Detention का मुद्दा: Centre से Supreme Court को दिए आश्वासन का सम्मान करने की मांग
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Citizens for Justice and Peace (CJP) ने विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारियों (Protesters) की कथित हिरासत को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। क्या है पूरा मामला? CJP का आरोप है कि कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया है। संगठन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट को दिए गए अपने आश्वासन का पालन सुनिश्चित करे और राज्यों को कानून के दायरे में कार्य करने के निर्देश दे। सुप्रीम कोर्ट के आश्वासन का जिक्र CJP ने कहा कि केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और कानून के अनुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था। संगठन का कहना है कि उसी भावना के अनुरूप सभी राज्यों में कार्रवाई होनी चाहिए। लोकतंत्र और विरोध का अधिकार भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। हालांकि, कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की जिम...
NEET Re-Exam Result से टूटा सपना: Medical Aspirant ने की आत्महत्या, Suicide Note में लिखा– 'मैं Average Student हूं'
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NEET Re-Exam Result के बाद दर्दनाक घटना देशभर में मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने का सपना देखने वाले लाखों छात्रों के बीच एक दुखद खबर सामने आई है। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में 19 वर्षीय एक मेडिकल अभ्यर्थी ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार, छात्रा NEET री-एग्जाम के परिणाम से बेहद निराश थी और इसी मानसिक तनाव के चलते उसने यह कदम उठाया। Suicide Note में क्या लिखा? पुलिस को घटनास्थल से एक कथित सुसाइड नोट मिला है। इसमें छात्रा ने खुद को "एक औसत (Average) छात्र" बताया और लिखा कि वह NEET री-एग्जाम में मिले कम अंकों से बेहद निराश थी। पुलिस ने नोट को जांच के लिए सुरक्षित रख लिया है और मामले की जांच जारी है। वर्षों की मेहनत पर फिरा पानी जानकारी के अनुसार, छात्रा लंबे समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। परिवार और शिक्षकों को उससे काफी उम्मीदें थीं। लेकिन री-एग्जाम के परिणाम आने के बाद वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने किसी साजिश की पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले की जांच जारी है। NEET विवाद और बढ़ता मानसिक दबाव हाल के महीनों में ...
NEET पर Veerapandian का बड़ा बयान: Medical Education में Fear और Anxiety का माहौल बना रहा है NEET
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नई दिल्ली: मेडिकल शिक्षा में NEET परीक्षा को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता और सार्वजनिक मामलों के वक्ता Veerapandian ने कहा है कि NEET मेडिकल शिक्षा में डर (Fear) और चिंता (Anxiety) का माहौल पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश के लिए केवल एक परीक्षा पर अत्यधिक निर्भरता छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ाती है। उनके अनुसार, कई छात्र लगातार तनाव और असफलता के डर में रहते हैं, जिसका असर उनकी पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। Veerapandian ने सुझाव दिया कि मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को अधिक समावेशी और छात्र-अनुकूल बनाया जाना चाहिए, ताकि विभिन्न पृष्ठभूमि के छात्रों को समान अवसर मिल सके। उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ाना नहीं, बल्कि योग्य छात्रों को आगे बढ़ने का अवसर देना भी होना चाहिए। हालांकि, NEET के समर्थकों का कहना है कि यह परीक्षा पूरे देश में मेडिकल प्रवेश के लिए एक समान और पारदर्शी प्रणाली प्रदान करती है। उनका तर्क है कि एकीकृत परीक्षा से प्रवेश प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष होती है। फिलहाल NEET को लेकर विभिन्न पक्...
Supreme Court में PIL: Student Protesters पर Force Use को लेकर Delhi Police और CAPF Officers के खिलाफ FIR की मांग
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सुप्रीम कोर्ट में छात्र प्रदर्शन का मामला पहुंचा, PIL में दिल्ली पुलिस और CAPF अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग नई दिल्ली: छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग को लेकर अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतंत्र में नागरिकों का अधिकार है और यदि किसी अधिकारी ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। PIL में सुप्रीम Court से मांग की गई है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं, पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से घटना को लेकर उनका पक्ष और जांच के बाद की स्थिति ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट करेगी। फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत है और आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगी। मुख्य बाते...
FIR Against Actor Sreelekha Mitra for Allegedly Carrying Objectionable Poster of PM modi
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PM मोदी का आपत्तिजनक पोस्टर विवाद: अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा के खिलाफ FIR, जानिए पूरा मामला कोलकाता में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बंगाली अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा विवादों में आ गई हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कथित रूप से आपत्तिजनक पोस्टर हाथ में लिया था। इस मामले को ले कर उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और कई मीडिया रिपोर्टों में FIR दर्ज होने की बात भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा नेता केया घोष सहित अन्य लोगों ने इस घटना को प्रधानमंत्री का अपमान बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसा पोस्टर प्रदर्शित कर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई। वहीं, श्रीलेखा मित्रा ने इन आरोपों पर अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि रैली के दौरान किसी व्यक्ति ने उन्हें पोस्टर पकड़ाया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय उन्होंने अपना पढ़ने वाला चश्मा नहीं पहना था, इसलिए पोस्टर पर क्या बना था, यह उन्होंने ठीक से नहीं देखा। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री का अपमान करने की ...
अमेरिका Return, पहला Show Flop... 37 दिन के आंदोलन से Game पलटने वाले अभिजीत दिपके की कहानी
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America Return, First Show Flop... The Story of Abhijeet Dipke Who Changed the Game with a 37-Day Protest सोशल मीडिया से शुरू हुआ एक विचार कैसे राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन में बदल गया, यह कहानी अभिजीत दिपके के नाम से जोड़ी जा रही है। हाल के महीनों में वे CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) से जुड़े आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका से लौटने के बाद उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम खास असर नहीं छोड़ पाया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आंदोलन को जारी रखा। कौन हैं अभिजीत दिपके? अभिजीत दिपके को CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का संस्थापक बताया जाता है। यह एक व्यंग्यात्मक (Satirical) आंदोलन है, जिसकी शुरुआत सोशल मीडिया अभियान से हुई और बाद में यह जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन में बदल गया। 37 दिन का आंदोलन कैसे बना चर्चा का विषय? रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलन के दौरान कई राज्यों से छात्र और समर्थक जंतर-मंतर पहुंचे। सोनम वांगचुक के अनशन और बाद की घटनाओं ने इस आंदोलन को और अधिक चर्चा में ला दिया। आंदोलन करीब 37 दिनों तक चला और अंत में सरकार तथा आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के ब...
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नाली और आसपास का कचरा साफ करने से ही विकास पूरा नहीं होता। हमें अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और रोजगार भी चाहिए। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? | Successmee2
साफ़-सफ़ाई किसी भी शहर और गाँव के लिए ज़रूरी है। स्वच्छ सड़कें, साफ़ नालियाँ और कचरा प्रबंधन नागरिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लेकिन क्या केवल यही विकास की पहचान है? आज भी देश के कई हिस्सों में लोग अच्छे सरकारी स्कूल, पर्याप्त शिक्षक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर अस्पताल, समय पर इलाज, आवश्यक दवाइयाँ और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। जब युवाओं को रोजगार नहीं मिलता, बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिलती और मरीजों को इलाज के लिए दूर-दूर भटकना पड़ता है, तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी किसकी है। भारत के संविधान और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सेवाओं की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अलग-अलग स्तरों पर साझा होती है। स्थानीय निकायों की भी अपनी भूमिका होती है। नागरिकों को भी अपने जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही मांगने और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी आवाज़ उठाने का अधिकार है। विकास का अर्थ केवल साफ़ सड़कें और नालियाँ नहीं, बल्कि ऐसा समाज है जहाँ हर बच्चे को अच्छी शिक्षा, हर मरीज को बेहतर इलाज और हर युवा ...
कपड़ा धोने वाले बैट से सोते हुए पति की हत्या, बिस्तर पर मिली लाश;
पूरी खबर देश को झकझोर देने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक महिला पर आरोप है कि उसने देर रात सो रहे अपने पति पर कपड़े धोने वाले बैट से हमला कर दिया। हमला इतना गंभीर बताया जा रहा है कि पति की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद महिला अपने बच्चों को लेकर घर से चली गई, जिसके बाद पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है। बताया जा रहा है कि सुबह जब परिजनों और पड़ोसियों को काफी देर तक घर से कोई हलचल सुनाई नहीं दी, तो उन्होंने अंदर जाकर देखा। वहां बिस्तर पर पति का शव पड़ा मिला। घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल का निरीक्षण किया गया, साक्ष्य एकत्र किए गए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में घरेलू विवाद को संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन पुलिस का कहना है कि अभी जांच जारी है और सभी पहलुओं पर काम किया जा रहा है। घटना के पीछे की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस ने महिला की तलाश के लिए विशेष टीमो...
क्या इसी दिन के लिए जनता ने अपना वोट दिया था? 🇮🇳😢
जिन हाथों ने वोट देकर आपको सत्ता तक पहुँचाया, आज वही हाथ अपने बच्चों के लिए न्याय और जवाब मांग रहे हैं। जिन बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है, अगर वही अपनी बात रखने के लिए सड़कों पर संघर्ष करते दिखाई दें, तो हर माँ-बाप का दिल दर्द से भर उठता है। साहब, ये दुश्मन नहीं... इसी देश के बच्चे हैं। इनकी आवाज़ सुनिए, इनकी बात समझिए। लोकतंत्र की ताकत संवाद में है, टकराव में नहीं। "सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए-क़ातिल में है।" यह पंक्ति केवल संघर्ष की नहीं, बल्कि अन्याय के सामने झुकने से इंकार करने के साहस की प्रतीक है। याद रखिए, कुर्सियाँ जनता के भरोसे से मिलती हैं और लोकतंत्र जनता की आवाज़ से चलता है। सवालों का जवाब संवाद से दिया जाता है, क्योंकि किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी जागरूक जनता होती है। जनता की आवाज़ को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता। अंतिम फैसला जनता ही अपने वोट से करती है। 🇮🇳
क्या देश में ऐसी स्थिति आनी चाहिए कि बच्चों पर लाठीचार्ज हो?
जब भी किसी प्रदर्शन में छात्रों या युवाओं पर बल प्रयोग की खबरें सामने आती हैं, तो पूरा देश भावुक हो जाता है। हर नागरिक के मन में एक ही सवाल उठता है—क्या लोकतंत्र में संवाद की जगह लाठीचार्ज होना चाहिए? भारत का भविष्य उसके युवा और छात्र हैं। उनकी आवाज़ को सुनना, उनकी समस्याओं का समाधान करना और शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान है। यदि किसी मुद्दे पर मतभेद हैं, तो उनका समाधान कानून, संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। भारतीय सेना देश की सीमाओं की रक्षा के लिए समर्पित है। वहीं आंतरिक कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से पुलिस और अन्य नागरिक सुरक्षा एजेंसियों की होती है। इसलिए सेना के नाम पर कोई भी अपुष्ट बयान फैलाना उचित नहीं है। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें यह अपेक्षा करनी चाहिए कि देश में ऐसा वातावरण बने, जहाँ बच्चों, छात्रों और युवाओं की बात सुनी जाए, और किसी भी पक्ष को हिंसा या बल प्रयोग का सामना न करना पड़े। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवाद, संवेदनशीलता और न्याय है। यदि हम इन मूल्यों को मजबूत करेंगे, तो देश भी...
Breaking: Dharmendra Pradhan ने दिया इस्तीफा | NEET Protest Latest News
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, देश की राजनीति में बड़ा भूचाल | जानिए पूरी वजह नई दिल्ली | 25 जुलाई 2026: देशभर में छात्रों के आंदोलन, NEET-UG 2026 विवाद और लगातार बढ़ते जनदबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया, जिसके बाद देशभर में इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। क्यों देना पड़ा इस्तीफा? पिछले कई सप्ताह से छात्र संगठन और विभिन्न सामाजिक समूह परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे। आंदोलन तेज होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पर नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने का दबाव बढ़ता गया। इस्तीफे में क्या कहा? धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने हमेशा छात्रों के हित में काम किया और देश के युवाओं का भविष्य सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि वे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ रहे हैं ताकि शिक्षा व्यवस्था पर जनता का विश्वास बना रहे। पूरे देश में चर्चा इ...
राहुल गांधी हिरासत में: दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लिया डिटेंशन में
नई दिल्ली: विपक्ष के नेता राहुल गांधी को मंगलवार को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत (डिटेंशन) में लिया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें रोककर अपने साथ ले गई। राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार की आलोचना की और सरकार से जवाबदेही की मांग की। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा कारणों से यह कार्रवाई की गई। घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बताया। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति वाले प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए गए। फिलहाल राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने की घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। मामले पर आगे की जानकारी का इंतजार है। मुख्य बातें: - राहुल गांधी को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया। - दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला दिया। - कांग्रेस ने कार्रवाई का विरोध किया। - मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने...
15 अगस्त केवल हाथ में तिरंगा लेकर फोटो खिंचवाने का दिन नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का संकल्प लेने का दिन है। | Successmee2
परिचय 15 अगस्त भारत का स्वतंत्रता दिवस है। यह उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने का दिन है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए संघर्ष किया। यह दिन केवल झंडा फहराने या फोटो खिंचवाने का अवसर नहीं, बल्कि यह सोचने का भी दिन है कि हम अपने समाज और देश के लिए क्या कर रहे हैं। अगर कोई नेता आपके स्कूल आए, तो सम्मानपूर्वक सवाल पूछिए लोकतंत्र में नागरिकों को अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछने का अधिकार है। यदि कोई जनप्रतिनिधि आपके विद्यालय में आए, तो विनम्रता से ऐसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं: क्या आपने हमारे स्कूल की स्थिति देखने और उसे बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए हैं? क्या हमारे विद्यालय में नए भवन, कक्षाएँ, पुस्तकालय, प्रयोगशाला या खेल सुविधाओं के लिए कोई काम हुआ है? क्या पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं और बच्चों की पढ़ाई बेहतर बनाने के लिए क्या प्रयास किए गए हैं? शिक्षा पर सवाल पूछना आपका अधिकार है यदि कोई आपको तिरंगा देकर देशभक्ति का संदेश दे, तो सम्मानपूर्वक यह भी पूछ सकते हैं: हमारी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आपने क्या किया है? स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए क्या कदम...
आज क्या हमारा देश फिर से गुलाम जैसा महसूस होने लगा है? हक मांगने पर लाठी, आँसू गैस और बंदूकें क्यों?
"साहब, ये आतंकवादी नहीं... आपके ही देश के बच्चे हैं, जिनकी माँओं ने अपने वोट से आपको सत्ता तक पहुँचाया है।" 😭🇮🇳 जब लोकतंत्र में अपने अधिकारों की मांग करने वाले छात्र और नागरिक सड़कों पर उतरते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि उनकी बात सुनी जाएगी या उन पर बल प्रयोग होगा। हर नागरिक को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। यदि कहीं प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज, आँसू गैस या अन्य बल प्रयोग होता है, तो स्वाभाविक है कि लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं। लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि सरकार और जनता के बीच संवाद बना रहे। आज कई लोगों के मन में यह पीड़ा है कि जिन बच्चों के भविष्य के लिए उनके माता-पिता ने वोट दिया, वही बच्चे अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील नागरिक को दुखी कर सकता है। देश को मजबूत बनाने का रास्ता डर या हिंसा नहीं, बल्कि संवाद, न्याय और संविधान से होकर जाता है। जनता सवाल पूछेगी, सरकार जवाब देगी और अंततः लोकतंत्र में फैसला जनता अपने वोट से करेगी। लोकतंत्र की ताकत जनता है। जनता की आवाज़ सुनी जानी चाहिए, क्योंकि यही सं...
Jantar Mantar Protest: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, तेज प्रताप यादव ने सरकार को दी नसीहत
Jantar Mantar Protest: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, तेज प्रताप यादव ने सरकार को दी नसीहत नई दिल्ली | 25 जुलाई 2026 दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा CJP का विरोध प्रदर्शन लगातार चर्चा में बना हुआ है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन इस्तीफे की मांग पर अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेज प्रताप यादव ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि छात्रों के हित सर्वोपरि होने चाहिए और सरकार को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए। तेज प्रताप यादव ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि वह ...
बच्चों, अगर आज सवाल नहीं पूछोगे, तो कल पूछने का मौका भी शायद न मिले | Successmee2
परिचय लोकतंत्र केवल वोट देने का नाम नहीं है। लोकतंत्र का अर्थ है कि नागरिक अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछ सकें और उनसे जवाबदेही मांग सकें। आज के छात्र ही कल के नागरिक हैं। इसलिए उन्हें अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझना चाहिए। यदि कोई नेता आपके स्कूल, कॉलेज या घर आए, तो सम्मानपूर्वक ये सवाल पूछिए 1. शिक्षा पर सवाल क्या आपने हमारे स्कूल और कॉलेज को बेहतर बनाने के लिए कोई काम किया? क्या सभी कक्षाओं में पर्याप्त शिक्षक हैं? कंप्यूटर लैब और डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था कब होगी? गर्मी में पंखे, साफ़ पानी और शौचालय जैसी सुविधाएँ कब पूरी होंगी? जिन स्कूलों की इमारत जर्जर है, उनकी मरम्मत कब होगी? 2. छात्रों की जरूरतों पर सवाल क्या गरीब बच्चों के लिए ड्रेस, किताबें, कॉपी और बैग की कोई योजना है? क्या छात्र-छात्राओं के लिए बस किराया कम या माफ़ करने की कोई योजना है? क्या हर बच्चे को समान अवसर मिल रहे हैं? 3. रोजगार पर सवाल पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं के लिए रोजगार के क्या अवसर तैयार किए जा रहे हैं? कौशल विकास और रोजगार से जुड़ी योजनाएँ हमारे क्षेत्र तक कब पहुँचेंगी? सम्मानपूर्वक सवाल पूछना आप...