Hakikat-o-tasavvur ke uljhan se dur irfan❤हकीकत-ओ-तसव्वुर के उलझन से दूर इरफ़ान
नफरत ही हर राय आँखों को दिखाती है,
कोई राय अच्छी तो कोई राय बुरी दिखाती है
मिल जाती है राहत उन्हें देख कर कभी,
तलप जाता है दिल जो मंजर आँखे दिखाती है
बार बार वो जो एक खाब देखता हूँ मै,
सवाल रात से है अधूरे खाब क्यों दिखाती है
लम्हो मे कैद तुझ से दूर पर यादो के करीब,
वक़्त भी ना जाने क्या क्या हालत दिखाती है
आसमा के ये झिलमिल सितारे और बादल
आँखे खुली या बंद मुझे नजर यही दिखाती है
हकीकत -ओ -तसव्वुर के उलझन से दूर इरफ़ान
उन रास्तो पे चलिए जरा जो मंजिल दिखाती है

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