असंगठित कामगार प्रदेश सचिव प्रदीप द्विवेदी जी का |अनूपपुर |आगमन पर भव्य स्वागत

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असंगठित कामगार प्रदेश सचिव प्रदीप द्विवेदी जी का |अनूपपुर |आगमन पर भव्य स्वागत 🌟 प्रदीप द्विवेदी जी – संक्षिप्त परिचय 🌟 प्रदीप द्विवेदी जी असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस (KKC) में प्रदेश सचिव के पद पर कार्यरत एक सक्रिय एवं लोकप्रिय युवा चेहरा हैं। वे समाजसेवा, संगठन मजबूती और मजदूर भाइयों की आवाज उठाने के लिए लगातार कार्य करते रहते हैं। पिता : उमेश द्विवेदी माता : उर्मिला द्विवेदी प्रदीप द्विवेदी जी अपने सरल स्वभाव, मेहनत और लोगों के प्रति सहयोग की भावना के कारण समाज में विशेष पहचान रखते हैं। वे हमेशा युवाओं, मजदूरों और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को लेकर सक्रिय रहते हैं तथा सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। उनकी मित्र मंडली में कई युवा साथी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं संगठन से जुड़े लोग शामिल हैं, जो समाजहित और संगठन को मजबूत बनाने के लिए उनके साथ निरंतर कार्य कर रहे हैं। असंगठित कामगार प्रदेश सचिव बनने के बाद प्रदीप द्विवेदी का हुआ भव्य स्वागत असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस (KKC) में प्रदेश सचिव का दायित्व मिलने के बाद जब प्रदीप द्विवेदी अपने गृह क्षेत्र पहुंच...

Hakikat-o-tasavvur ke uljhan se dur irfan❤हकीकत-ओ-तसव्वुर के उलझन से दूर इरफ़ान

हकीकत-ओ-तसव्वुर के उलझन से दूर इरफ़ान ❤ – Introduction (2026)

ज़िंदगी में कई बार हम हकीकत और तसव्वुर (ख्वाब) के बीच ऐसे उलझ जाते हैं कि समझ नहीं आता कौन सा सच है और कौन सा सिर्फ एक एहसास। हकीकत-ओ-तसव्वुर के उलझन से दूर इरफ़ान—यह सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि उस दिल की आवाज है जो सच्चाई और ख्वाबों के बीच भटक रहा है। इस पोस्ट में हम आपके लिए लेकर आए हैं गहरी और दिल को छू लेने वाली शायरी, जो इन जज़्बातों को बखूबी बयां करती है।
जब इंसान अपने ही ख्यालों में उलझ जाता है, तो कभी हकीकत भारी लगती है और कभी तसव्वुर सुकून देने लगता है। हकीकत-ओ-तसव्वुर के उलझन से दूर इरफ़ान जैसे अल्फाज़ हमें उस एहसास तक ले जाते हैं, जहाँ दिल अपने आप से सवाल करता है। यह शायरी सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने के लिए है।
अगर आप भी कभी अपने ख्वाबों और हकीकत के बीच खो गए हैं, तो यह शायरी आपके दिल को जरूर छू जाएगी। क्योंकि कहीं ना कहीं, हम सबके अंदर एक ऐसा “इरफ़ान” छुपा होता है, जो इन उलझनों से दूर सुकून की तलाश में रहता है… ❤✨


 नफरत ही हर राय आँखों को दिखाती है,

कोई राय अच्छी तो कोई राय बुरी दिखाती है

मिल जाती है राहत उन्हें देख कर कभी,

तलप जाता है दिल जो मंजर आँखे दिखाती है

बार बार वो जो एक खाब देखता हूँ मै,

सवाल रात से है अधूरे खाब क्यों दिखाती है

लम्हो मे कैद तुझ से दूर पर यादो के करीब,

वक़्त भी ना जाने क्या क्या हालत दिखाती है

आसमा के ये झिलमिल सितारे और बादल

आँखे खुली या बंद मुझे नजर यही दिखाती है

हकीकत -ओ -तसव्वुर के उलझन से दूर इरफ़ान

उन रास्तो पे चलिए जरा जो मंजिल दिखाती है 

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