असंगठित कामगार प्रदेश सचिव प्रदीप द्विवेदी जी का |अनूपपुर |आगमन पर भव्य स्वागत

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असंगठित कामगार प्रदेश सचिव प्रदीप द्विवेदी जी का |अनूपपुर |आगमन पर भव्य स्वागत 🌟 प्रदीप द्विवेदी जी – संक्षिप्त परिचय 🌟 प्रदीप द्विवेदी जी असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस (KKC) में प्रदेश सचिव के पद पर कार्यरत एक सक्रिय एवं लोकप्रिय युवा चेहरा हैं। वे समाजसेवा, संगठन मजबूती और मजदूर भाइयों की आवाज उठाने के लिए लगातार कार्य करते रहते हैं। पिता : उमेश द्विवेदी माता : उर्मिला द्विवेदी प्रदीप द्विवेदी जी अपने सरल स्वभाव, मेहनत और लोगों के प्रति सहयोग की भावना के कारण समाज में विशेष पहचान रखते हैं। वे हमेशा युवाओं, मजदूरों और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को लेकर सक्रिय रहते हैं तथा सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। उनकी मित्र मंडली में कई युवा साथी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं संगठन से जुड़े लोग शामिल हैं, जो समाजहित और संगठन को मजबूत बनाने के लिए उनके साथ निरंतर कार्य कर रहे हैं। असंगठित कामगार प्रदेश सचिव बनने के बाद प्रदीप द्विवेदी का हुआ भव्य स्वागत असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस (KKC) में प्रदेश सचिव का दायित्व मिलने के बाद जब प्रदीप द्विवेदी अपने गृह क्षेत्र पहुंच...

Kaas ki shimat jaati duriya -काश की सिमट जाती दूरिया

 अपनी उंगलियां आसमा पे यू फेरती है

सितारों से सितारा मिलाकर इक नाम लिख़ती है

मेरे लिखे कशीदे रोज -ब -रोज पढ़कर

वो मेरी हर इक बात रोज याद करती है



काश की सिमट जाती दूरिया इक आवाज़ मे

बहुत तड़पती है मुझसे जो इतनी दूर रहती है

बातो बातो के एता'अत हम एक दूसरे के लेकिन

कभी मुझसे तो कभी उनसे ये दिल -ए -रकावत उलझती है

Mr- इरफ़ान ❤

✨ काश की सिमट जाती दूरियाँ – 

काश की सिमट जाती दूरियाँ…

काश हम उन पलों को फिर से जी सकते, जो कभी हमारे बीच थे।

काश हर वो बात जो अधूरी रह गई, पूरा हो जाती।

काश हर वह खामोशी, हर वह तन्हाई, हर वह दूरी जो हमारे बीच आई, कभी न आती।

हम अक्सर जिन लोगों से दूर होते हैं, उन्हें समझने का मौका खो देते हैं।

हम अक्सर उन लम्हों की कद्र नहीं कर पाते, जो छोटे-छोटे पल होते हैं, लेकिन यादों में बहुत बड़े बन जाते हैं।

🌿 रिश्तों की कसक

रिश्ते हमेशा पास होने से मजबूत नहीं होते,

लेकिन पास होने की चाह और यादों की कसक उन्हें और गहरा बना देती है।

काश लोग समझ पाते कि हर दूरियां सिर्फ फिजिकल नहीं होती, कभी-कभी वो दिलों में भी रहती हैं।

🌿 यादों की मिठास

वो हँसी, वो बातें, वो पल जो साथ बिताए…

काश वह समय लौट आता, और हम फिर से वही कर पाते।

काश हम जानते कि हर “अलविदा” का मतलब हमेशा के लिए नहीं होता,

बल्कि यह सिर्फ एक नया अध्याय शुरू करने का मौका है।

🌿 मन की दूरी

कभी-कभी लोग फिजिकल पास होते हैं,

लेकिन मन में बहुत दूरियाँ रहती हैं।

काश लोग दिल से भी पास होते,

काश हम अपनी गलतफहमियों को दूर कर पाते।

🌿 उम्मीद और आशा

फिर भी, हर दूरी का मतलब हमेशा खोना नहीं है।

काश की सोच हमें आशा देती है,

काश की ख्वाहिश हमें सिखाती है कि हर पल की कद्र करो।

काश की दूरियाँ सिमट जातीं… तो शायद आज हम ज्यादा हँसते, ज्यादा प्यार करते, और ज्यादा पास होते।

लव 

नींद नहीं आती करवाटे बदलता हूं रात भर 

खैर जाने दे मेरे जागने से तुझे क्या 

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