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Ishq mera tu -इश्क मेरा तू
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इश्क़ मेरा मुन्तशिर है मेरे ख़्वाबों सा,
तू ही बता किस तरह समेटुँ इन्हें किताबों सा।
तेरी याद में हैं तर आँखें मैं भला सोऊँ कैसे,
तू ही तो जज़्ब है मेरी इन आँखों में आंसूओं सा।
कुछ कह नहीं पा रहा हूँ मेरी इतनी ख़ामी,
तू ही अब पढ़ ले मुझे किस्से-कहानियों सा।
ना जानें क्यों इतना तड़पाता है मुझे ये ख़ुलूस,
तू ही इन दूरियों को एहसास दे मुलाक़ातों सा।
वगर्ना यूँ तो इतना बेबस नहीं है इरफ़ान,
तू ही जानता है मेरा बिख़रना इन रंगों सा।
—𝓘𝓻𝓯𝓪𝓷 ¬🖤
बेटियां जिस घर मे जाती है,
अपने हाथो से वो घर सजाति है
माँ की दुलारी बाप का मान है,
लाडली सबकी और जरा शरारती है
कहती है मुस्कुराते हुए विदा होंगी,
अपनी विदाई मे मगर सबको रुलाती है
उनकी किलकारी घर की रहमत है,
बेटियां सारा जग जगत संवारती है
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