Russia Oil: भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाले बिल को अमेरिका के 60 सीनेटरों का समर्थन, रूसी तेल खरीद पर बढ़ा तनाव


वॉशिंगटन/नई दिल्ली: रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ सकता है। अमेरिका में एक द्विदलीय (Bipartisan) विधेयक को 60 से अधिक सीनेटरों का समर्थन मिल गया है। इस प्रस्तावित बिल में भारत सहित रूसी तेल के प्रमुख खरीदार देशों से आने वाले आयात पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है।



इससे पहले इसी तरह के प्रस्ताव में 500% टैरिफ का सुझाव था, लेकिन संशोधित बिल में इसे घटाकर 100% कर दिया गया है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बनाना और यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाले आर्थिक समर्थन को सीमित करना बताया जा रहा है।

यदि यह विधेयक अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित होकर कानून बनता है, तो भारत सहित रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने वाले देशों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्तावित बिल है, कानून नहीं बना है। इसके लागू होने से पहले इसे अमेरिकी विधायी प्रक्रिया के सभी चरणों से गुजरना होगा।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखे हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे की स्थिति अमेरिका-भारत के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ कांग्रेस में इस विधेयक की प्रगति पर निर्भर करेगी।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ सकता है। अमेरिका में एक द्विदलीय (Bipartisan) विधेयक को 60 से अधिक सीनेटरों का समर्थन मिल गया है। इस प्रस्तावित बिल में भारत सहित रूसी तेल के प्रमुख खरीदार देशों से आने वाले आयात पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है।



इससे पहले इसी तरह के प्रस्ताव में 500% टैरिफ का सुझाव था, लेकिन संशोधित बिल में इसे घटाकर 100% कर दिया गया है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बनाना और यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाले आर्थिक समर्थन को सीमित करना बताया जा रहा है।

यदि यह विधेयक अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित होकर कानून बनता है, तो भारत सहित रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने वाले देशों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्तावित बिल है, कानून नहीं बना है। इसके लागू होने से पहले इसे अमेरिकी विधायी प्रक्रिया के सभी चरणों से गुजरना होगा।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखे हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे की स्थिति अमेरिका-भारत के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ कांग्रेस में इस विधेयक की प्रगति पर निर्भर करेगी।

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