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सोनम वांगचुक के अनशन के बीच 1984 की तस्वीर वायरल, पिता सोनम वांग्याल के आंदोलन की फिर हुई चर्चा | Sonam Wangchuk Ladakh News
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लद्दाख। लद्दाख की मांगों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी बीच वर्ष 1984 की एक ऐतिहासिक तस्वीर सोशल मीडिया पर फिर से साझा की जा रही है, जिसमें उनके पिता सोनम वांग्याल भूख हड़ताल पर बैठे दिखाई देते हैं।
बताया जाता है कि उस समय सोनम वांग्याल ने लद्दाख को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर अनशन किया था। उस दौर में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उनसे मुलाकात कर उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद उनका अनशन समाप्त हुआ।
करीब चार दशक बाद, उसी क्षेत्र से सोनम वांगचुक भी अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अनशन कर रहे हैं। इस कारण 1984 की तस्वीर को लद्दाख के लंबे सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, वर्तमान आंदोलन की मांगें और परिस्थितियां 1984 से अलग हैं। ऐसे में दोनों आंदोलनों की तुलना करते समय उनके ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भों को ध्यान में रखना आवश्यक है। यह तस्वीर लोकतांत्रिक संवाद, शांतिपूर्ण आंदोलन और क्षेत्रीय अधिकारों से जुड़े प्रश्नों को फिर से चर्चा के केंद्र में ले आई है।
बताया जाता है कि उस समय सोनम वांग्याल ने लद्दाख को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर अनशन किया था। उस दौर में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उनसे मुलाकात कर उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद उनका अनशन समाप्त हुआ।
करीब चार दशक बाद, उसी क्षेत्र से सोनम वांगचुक भी अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अनशन कर रहे हैं। इस कारण 1984 की तस्वीर को लद्दाख के लंबे सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
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