द्रास सेक्टर के प्वाइंट 5140 पर कब्जा करने के बाद 13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स को प्वाइंट 4875 पर कब्जा करने का टास्क मिला था। इस इलाके को प्वाइंट 4875 के साथ-साथ फ्लैट टॉप के नाम से जाना जाता था। राइफलमैन संजय कुमार की बटालियन को इसे कब्जे में लेने का टास्क मिला था. इस ऑपरेशन में राइफलमैन संजय कुमार को सेक्शन लीड करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
प्वाइंट 4875 पर राइफलमैन संजय कुमार की बहादुरी ने भारतीय सेना को आगे बढ़ने का आधार दिया था। एक दिन पूर्व ही इस प्वाइंट पर संजय कुमार की चीते सी फुर्ती से दुश्मन पर कहर बनकर टूटी थी। 13 जैक राइफल के संजय कुमार प्वाइंट 4875 पर पहुंचे ही थे कि उनका सामना दुश्मन के आटोमैटिक फायर से हो गया।
टकराव इतना नजदीक से हुआ कि संजय कुमार तीन दुश्मनों के साथ गुत्थमगुत्था हो गए। हैंड टू हैंड फाइट में संजय कुमार ने तीनों को ढेर कर दिया। दुश्मन टुकड़ी के शेष जवान घबराहट में अपनी यूनिवर्सल मशीन गन छोड़कर भागने लगे। बुरी तरह से घायल संजय कुमार ने उसी यूएमजी से भागते दुश्मनों को भी ढेर कर दिया।
दुश्मन में हाथ से छीन ली गोलियां बरसाती मशीन गन:
अविश्वसनीय साहस दिखाते हुए संजय कुमार अपने एक साथी के साथ दुश्मन के पहले बंकर के एकदम करीब पहुंच गए। उनके साथी ने बंकर के अंदर एक ग्रेनेड फेंका और ठीक इसी समय संजय ने बंकर से बाहर झांक रहे आग मशीन गन के गर्म बैरल को अपने हाथ से पकड़कर बाहर खींच लिया। इतना ही नहीं उसी मशीन गन से हमला करते हुए उन्होंने तीन दुश्मनों को ढेर कर दिया।
दूसरे बंकर पर हमले के दौरान उन्हें पैर और शरीर के दूसरे हिस्सों में कई गोलियां लग गईं लेकिन उन्होंने लड़ाई नहीं छोड़ी। घायल अवस्था में भी उन्होंने छिपकर दुश्मन पर जवाबी हमला किया और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
संजय कुमार की इस दिलेरी ने अन्य जवानों में नई जान फूंक दी। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के रहने वाले संजय कुमार को इसी अदम्य साहस के लिए परमवीर चक्र का सम्मान मिला। 5 जुलाई को प्वाइंट 4875 और सटी चोटियों को वापस हासिल करने के लिए मेजर एसवी भास्कर, मेजर गुरप्रीत सिंह, मेजर विकास वोहरा और कैप्टन विक्रम बत्रा के नेतृत्व में टीमें आगे बढ़ीं।संजय कुमार द्वारा रखी गई जीत की नींव पर इन टीमों ने टाइगर हिल के शिखर सहित डॉग हिल, स्टैंग्पा नार्थ पर कब्जा कर लिया। लद्दाख स्काउट्स के नायब सूबेदार ताशी छेपाल का साहसिक नेतृत्व मिसाल के रूप में उभरा।💐🇮🇳💐🇮🇳
#indianarmy
द्रास सेक्टर के प्वाइंट 5140 पर कब्जा करने के बाद 13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स को प्वाइंट 4875 पर कब्जा करने का टास्क मिला था। इस इलाके को प्वाइंट 4875 के साथ-साथ फ्लैट टॉप के नाम से जाना जाता था। राइफलमैन संजय कुमार की बटालियन को इसे कब्जे में लेने का टास्क मिला था. इस ऑपरेशन में राइफलमैन संजय कुमार को सेक्शन लीड करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
प्वाइंट 4875 पर राइफलमैन संजय कुमार की बहादुरी ने भारतीय सेना को आगे बढ़ने का आधार दिया था। एक दिन पूर्व ही इस प्वाइंट पर संजय कुमार की चीते सी फुर्ती से दुश्मन पर कहर बनकर टूटी थी। 13 जैक राइफल के संजय कुमार प्वाइंट 4875 पर पहुंचे ही थे कि उनका सामना दुश्मन के आटोमैटिक फायर से हो गया।
टकराव इतना नजदीक से हुआ कि संजय कुमार तीन दुश्मनों के साथ गुत्थमगुत्था हो गए। हैंड टू हैंड फाइट में संजय कुमार ने तीनों को ढेर कर दिया। दुश्मन टुकड़ी के शेष जवान घबराहट में अपनी यूनिवर्सल मशीन गन छोड़कर भागने लगे। बुरी तरह से घायल संजय कुमार ने उसी यूएमजी से भागते दुश्मनों को भी ढेर कर दिया।
दुश्मन में हाथ से छीन ली गोलियां बरसाती मशीन गन:
अविश्वसनीय साहस दिखाते हुए संजय कुमार अपने एक साथी के साथ दुश्मन के पहले बंकर के एकदम करीब पहुंच गए। उनके साथी ने बंकर के अंदर एक ग्रेनेड फेंका और ठीक इसी समय संजय ने बंकर से बाहर झांक रहे आग मशीन गन के गर्म बैरल को अपने हाथ से पकड़कर बाहर खींच लिया। इतना ही नहीं उसी मशीन गन से हमला करते हुए उन्होंने तीन दुश्मनों को ढेर कर दिया।
दूसरे बंकर पर हमले के दौरान उन्हें पैर और शरीर के दूसरे हिस्सों में कई गोलियां लग गईं लेकिन उन्होंने लड़ाई नहीं छोड़ी। घायल अवस्था में भी उन्होंने छिपकर दुश्मन पर जवाबी हमला किया और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
संजय कुमार की इस दिलेरी ने अन्य जवानों में नई जान फूंक दी। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के रहने वाले संजय कुमार को इसी अदम्य साहस के लिए परमवीर चक्र का सम्मान मिला। 5 जुलाई को प्वाइंट 4875 और सटी चोटियों को वापस हासिल करने के लिए मेजर एसवी भास्कर, मेजर गुरप्रीत सिंह, मेजर विकास वोहरा और कैप्टन विक्रम बत्रा के नेतृत्व में टीमें आगे बढ़ीं।संजय कुमार द्वारा रखी गई जीत की नींव पर इन टीमों ने टाइगर हिल के शिखर सहित डॉग हिल, स्टैंग्पा नार्थ पर कब्जा कर लिया। लद्दाख स्काउट्स के नायब सूबेदार ताशी छेपाल का साहसिक नेतृत्व मिसाल के रूप में उभरा।💐🇮🇳💐🇮🇳
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