अनूपपुर/कोतमा।
बुदुन जैतपुर गांजा कांड का मुख्य आरोपी भले ही पुलिस की फाइलों में 'फरार' दर्ज हो, लेकिन इलाके में गांजे की तस्करी आज भी बदस्तूर जारी है। पुलिस की नाक के नीचे से नशीले पदार्थों की खेप लगातार पार हो रही है। इस पूरे काले साम्राज्य के पीछे एक ऐसे 'शतरंज के खेल' का खुलासा हुआ है, जिसके मोहरे बेहद शातिर हैं।
ओडिशा से मनेंद्रगढ़ और कोतमा: तय रूट, पक्के प्यादे
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य केंद्र ओडिशा है, जहां से गांजे की बड़ी खेप और काले धन (पैसा) का मुख्य लेनदेन संचालित होता है। लेकिन इस माल को सुरक्षित सीमा पार कराने और ठिकाने तक पहुंचाने का जिम्मा स्थानीय स्तर पर बैठे कुछ खास 'प्यादों' का है।
इस रूट में ओडिशा से मनेंद्रगढ़ और वहां से कोतमा एरिया पार कराने की पूरी प्लानिंग इतनी सटीक होती है कि जांच एजेंसियां भी गच्चा खा जाएं। हर इलाके के लिए अलग-अलग कोडवर्ड और अलग-अलग प्यादे तैनात किए गए हैं।
'बाबू बनिया टोला': वफादार मेडिएटर या मास्टरमाइंड का राइट हैंड?
इस पूरे खेल में अब एक नया और चौंकाने वाला नाम सामने आ रहा है—"बाबू बनिया टोला"।
चर्चा है कि यह शख्स इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा 'मेडिएटर' (बिचौलिया) है। इसका मुख्य काम नशीले पदार्थों के बड़े सौदागरों और मालिकों के बीच कड़क नोटों (पैसे) की सुरक्षित डिलीवरी करवाना है।
वफादारी का खेल: गांजा व्यापारियों के इशारों पर नाचने वाला यह मेडिएटर हर तरफ अपनी 'वफादारी' निभा रहा है, ताकि ओडिशा से आने वाला पैसा और माल बिना किसी रुकावट के अपने आकाओं तक पहुंच जाए।
बड़ा सवाल: आखिर कौन है यह कोतमा का 'बाबू', जो कानून को ठेंगा दिखाकर गांजा व्यापारियों के लिए ढाल बना हुआ है? बुदुन जैतपुर कांड के मुख्य आरोपी के फरार होने के बाद भी यह तस्करी किसके संरक्षण में फल-फूल रही है?
शेष अगले अंक में...
क्या है बाबू बनिया टोला का असली चेहरा?
कोतमा से लेकर जैतपुर तक फैले इस सिंडिकेट में और कौन-से सफेदपोश शामिल हैं?
पैसे के लेनदेन के वो पुख्ता सबूत जो हिला देंगे प्रशासन की कुर्सी!
देखते रहिए, 'The GPS Ghanshyam' की विशेष खोजी रिपोर्ट... परत दर परत खुलेगा हर राज!अनूपपुर/कोतमा।
बुदुन जैतपुर गांजा कांड का मुख्य आरोपी भले ही पुलिस की फाइलों में 'फरार' दर्ज हो, लेकिन इलाके में गांजे की तस्करी आज भी बदस्तूर जारी है। पुलिस की नाक के नीचे से नशीले पदार्थों की खेप लगातार पार हो रही है। इस पूरे काले साम्राज्य के पीछे एक ऐसे 'शतरंज के खेल' का खुलासा हुआ है, जिसके मोहरे बेहद शातिर हैं।
ओडिशा से मनेंद्रगढ़ और कोतमा: तय रूट, पक्के प्यादे
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य केंद्र ओडिशा है, जहां से गांजे की बड़ी खेप और काले धन (पैसा) का मुख्य लेनदेन संचालित होता है। लेकिन इस माल को सुरक्षित सीमा पार कराने और ठिकाने तक पहुंचाने का जिम्मा स्थानीय स्तर पर बैठे कुछ खास 'प्यादों' का है।
इस रूट में ओडिशा से मनेंद्रगढ़ और वहां से कोतमा एरिया पार कराने की पूरी प्लानिंग इतनी सटीक होती है कि जांच एजेंसियां भी गच्चा खा जाएं। हर इलाके के लिए अलग-अलग कोडवर्ड और अलग-अलग प्यादे तैनात किए गए हैं।
'बाबू बनिया टोला': वफादार मेडिएटर या मास्टरमाइंड का राइट हैंड?
इस पूरे खेल में अब एक नया और चौंकाने वाला नाम सामने आ रहा है—"बाबू बनिया टोला"।
चर्चा है कि यह शख्स इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा 'मेडिएटर' (बिचौलिया) है। इसका मुख्य काम नशीले पदार्थों के बड़े सौदागरों और मालिकों के बीच कड़क नोटों (पैसे) की सुरक्षित डिलीवरी करवाना है।
वफादारी का खेल: गांजा व्यापारियों के इशारों पर नाचने वाला यह मेडिएटर हर तरफ अपनी 'वफादारी' निभा रहा है, ताकि ओडिशा से आने वाला पैसा और माल बिना किसी रुकावट के अपने आकाओं तक पहुंच जाए।
बड़ा सवाल: आखिर कौन है यह कोतमा का 'बाबू', जो कानून को ठेंगा दिखाकर गांजा व्यापारियों के लिए ढाल बना हुआ है? बुदुन जैतपुर कांड के मुख्य आरोपी के फरार होने के बाद भी यह तस्करी किसके संरक्षण में फल-फूल रही है?
शेष अगले अंक में...
क्या है बाबू बनिया टोला का असली चेहरा?
कोतमा से लेकर जैतपुर तक फैले इस सिंडिकेट में और कौन-से सफेदपोश शामिल हैं?
पैसे के लेनदेन के वो पुख्ता सबूत जो हिला देंगे प्रशासन की कुर्सी!
देखते रहिए, 'The GPS Ghanshyam' की विशेष खोजी रिपोर्ट... परत दर परत खुलेगा हर राज!
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