एसडीएम ने नालों, जलभराव वाले क्षेत्रों एवं सीवरेज कार्यों का किया निरीक्षण

.... अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्रीमती अमृता गर्ग ने वर्षा ऋतु के मद्देनज़र नगर में जलभराव की समस्या से नागरिकों को राहत दिलाने एवं जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से नगर पालिका परिषद शहडोल क्षेत्र के विभिन्न नालों, संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों तथा सीवरेज पाइपलाइन बिछाने के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नाला सफाई कार्य प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि वर्षा के दौरान किसी भी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने संचालित सीवरेज पाइपलाइन बिछाने के कार्यों का भी निरीक्षण किया तथा कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी कार्यस्थलों पर बैरिकेडिंग, सुरक्षा घेराव एवं चेतावनी संकेतक (साइन बोर्ड) अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री निशांत सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

महिलाएं भी अपराध करती है, ये सच है पर असली मुद्दा है इसको लेकर सारे पुरुषों का हाय तौबा मचाना...



सब ऐसे दिखा रहे है जैसे सारी महिलाएं खूंखार अपराधी हो!सभी पुरुषों के जान खतरे में हो..हालांकि न पुरुषों ने शादी करना छोड़ दिया है न पति, भाई पति का कर्तव्य निभाते हुए औरत को मारना! नौकरी करने पर पत्नी का हाथ काटने वाला तो नहीं डरा..न पत्नी को छत से फेंकने वाला को डर लगा..!न बेटा पैदा न करने पर पत्नी का गला घोंटने वाला पति डरा न जींस पहनने पर बेटी को मार कर नदी में फेंकने वाला बाप डरा न अन्य जाती से शादी करने पर बहन का कटा सर लेकर सरेआम घूमने वाला भाई डरा! और हाल ही में अपने पत्नी को गाड़ी बंद करके नहर में फेंकने वाला पति डरा..सिया गोयल मामले में अलग हो जाते क्यों मारा कहने वालों को भी छोड़ देता मारने की क्या जरूरत थी कहते सुना।हमने तो अक्सर किसी महिला की हत्या पर लोगो को डिफेंड करते और हत्या को सही ठहराते ही देखा है।
फिर ये किस बात को लेकर खुद को ' विलुप्त प्राय प्रजाति ' साबित करने पर तुले हुए है?

सब ऐसे दिखा रहे है जैसे सारी महिलाएं खूंखार अपराधी हो!सभी पुरुषों के जान खतरे में हो..हालांकि न पुरुषों ने शादी करना छोड़ दिया है न पति, भाई पति का कर्तव्य निभाते हुए औरत को मारना! नौकरी करने पर पत्नी का हाथ काटने वाला तो नहीं डरा..न पत्नी को छत से फेंकने वाला को डर लगा..!न बेटा पैदा न करने पर पत्नी का गला घोंटने वाला पति डरा न जींस पहनने पर बेटी को मार कर नदी में फेंकने वाला बाप डरा न अन्य जाती से शादी करने पर बहन का कटा सर लेकर सरेआम घूमने वाला भाई डरा! और हाल ही में अपने पत्नी को गाड़ी बंद करके नहर में फेंकने वाला पति डरा..सिया गोयल मामले में अलग हो जाते क्यों मारा कहने वालों को भी छोड़ देता मारने की क्या जरूरत थी कहते सुना।हमने तो अक्सर किसी महिला की हत्या पर लोगो को डिफेंड करते और हत्या को सही ठहराते ही देखा है।
फिर ये किस बात को लेकर खुद को ' विलुप्त प्राय प्रजाति ' साबित करने पर तुले हुए है?

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