भारत में इस समय नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों, अभिभावकों और आम जनता में भारी गुस्सा देखा जा रहा है।
देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे ने अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले लिया है। परीक्षा में बैठे लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है, जिसके कारण छात्रों और युवाओं में आक्रामकता और मानसिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पूरे विवाद के केंद्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं। देश भर के छात्र संगठनों, विपक्षी दलों और आम जनता का मानना है कि शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) परीक्षा की शुचिता बनाए रखने में पूरी तरह विफल रहे हैं। लोगों का कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी केवल एक तकनीकी खामी नहीं है, बल्कि यह देश के होनहार युवाओं के सपनों और उनके भविष्य के साथ एक क्रूर मजाक है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, पूरे भारत की जनता और पीड़ित छात्रों की तरफ से अब एक ही सुर में आवाज उठ रही है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस नैतिक जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। छात्रों का कहना है कि जब तक शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी और दोषियों के खिलाफ कड...

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