Taj Mahal (What is special about Taj Mahal?)
अब तो शमा-ए-आशिक़ी भी जलती बुझती है,
लगता है ये हवा कोई साज़िश किए फ़िरती है।
आओं तुम तुम्हारी कमी सी है मेरे आशियाँ में,
बे-वज्ह मुझे ये बारिश दिल-ए-तन्हा समझती है।
हां तू ग़ज़ल बन कर मिलती है मेरे ख़्याल में,
फिर भी तू मुझे याद बन कर हर वक़्त सताती है।
तस्वीर है तू उसकी जो दिखती है मेरे ख़्वाब में,
सुन मेरी जाँ तुझे मेरी आँखें कुछ बताना चाहती है।
इक ख़ुबसूरत इमारत इश्क़ का है मेरे दिल में,
हूबहू वैसे ही जिसे दुनिया ताज महल कहती है।
—𝓘𝓻𝓯𝓪𝓷¬🖤
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