Zism mera isi mitti ka talav-gaar hai-जिस्म मेरा इसी धरती का तलबगार है
जिस्म मेरा इसी धरती का तलबगार है,
लहू मे मेरे इसी मिट्टी का इश्क़ आबाद है!
उत्तर से दक्षिण तक पूर्ब से पश्चिम तक,
हर शहर हर गाँव सबका यही खाब है!
दिल-ओ जहन मे तेरा प्यार बसाया है,
ऐ वतन तेरे लिए सब कुछ कुर्बान है!
आबा-ओ-अजदाद इसी मिट्टी मे दफ़न है मेरे,
भारत की सर्जमी से मुक़म्मल मेरा ईमान है!
कुदरत की गोद मे पला बढ़ा इरफ़ान ❤
खेतो खलयानो से जुडा हर जज्बात है!

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