Latest news
बुढ़ार जनपद शिक्षा केंद्र का महा-फर्जीवाड़ा: 14 साल से अंगद की तरह पैर जमाए बैठे मनोज शुक्ला का काला चिट्ठा उजागर, बैक-डोर से रसोइयों की भर्ती का खेल; कब होगी जांच?
- Get link
- X
- Other Apps
शहडोल/बुढ़ार। जिला पंचायत शहडोल के अंतर्गत आने वाले विकासखंड बुढ़ार के जनपद शिक्षा केंद्र (BRC) में भ्रष्टाचार और तानाशाही का एक ऐसा घिनौना खेल सामने आया है, जिसने पूरे शिक्षा विभाग को हिलाकर रख दिया है। पीएम पोषण (मध्यान्ह भोजन) योजना, जो गरीब बच्चों के निवाले से जुड़ी है, उसे भ्रष्टाचार का चारागाह बना दिया गया। 14 वर्षों से एक ही जगह पर मलाई काट रहे और वर्तमान में प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद हटाए गए बीएसी मनोज शुक्ला के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा अब जनता के सामने आ चुका है।
## 1. 14 साल की 'धाक' और नियमों का कत्लेआम कहते हैं कि सरकारी तंत्र में तबादले और नियुक्तियां नियमों के तहत होती हैं, लेकिन जनपद शिक्षा केंद्र बुढ़ार में मनोज शुक्ला ने अपनी ऐसी 'धाक' जमा रखी थी कि शासन के नियम और निर्देश इनके सामने बौने साबित हो रहे थे। पिछले 14 सालों से एक ही जगह जमे रहकर इन्होंने पूरे सिस्टम को अपनी उंगलियों पर नचाया। आखिरकार इनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर इन्हें हटा तो दिया गया, लेकिन इनके द्वारा बोए गए भ्रष्टाचार के कांटे आज भी व्यवस्था को लहूलुहान कर रहे हैं।
## 2. बैक-डोर एंट्री का खेल: नियम विरुद्ध रसोइयों को हटाया और चहेतों को नवाजा
खोजी रिपोर्ट में यह साफ खुलासा हुआ है कि मनोज शुक्ला ने अपने कार्यकाल के दौरान मध्यान्ह भोजन संचालित करने वाले रसोइयों की नियुक्ति और उन्हें हटाए जाने में भारी फर्जीवाड़ा किया।
नियमों को ताक पर रखा: वर्षों से ईमानदारी से काम कर रहे गरीब रसोइयों को बिना किसी ठोस कारण के, नियम विरुद्ध तरीके से नौकरी से निकाल बाहर किया गया।
बैक-डोर से एंट्री: अपने चहेतों और सांठगांठ वाले लोगों को मोटी रकम या प्रभाव के चलते 'बैक डोर' (चोर दरवाजे) से रसोइया के पदों पर नियुक्त कर दिया गया।
## 3. वरिष्ठ अधिकारियों को 'अंधेरे' में रखकर खेला गया गंदा खेल हैरानी की बात यह है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा और कागजी हेरफेर मनोज शुक्ला द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारियों को धोखे में रखकर किया गया। सूत्रों की मानें तो रसोइयों को हटाने और रखने के जो प्रस्ताव जिला पंचायत या वरिष्ठ कार्यालयों को भेजे गए, उनमें तथ्यों को इस तरह मरोड़ा गया कि ऊपर बैठे अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। विभागीय साख को दांव पर लगाकर खेला गया यह खेल सीधे तौर पर एक महा-घोटाले की ओर इशारा करता है।
## 4. खुलासा होने के बाद भी मास्टरमाइंड 'बेफिक्र', तंत्र मौन!
इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ होने के बाद भी सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह है कि—इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड मनोज शुक्ला आज भी बेफिक्र क्यों घूम रहा है? शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इस चेहरे पर अब तक कानून का शिकंजा क्यों नहीं कसा?
क्या विभाग के कुछ और बड़े मगरमच्छ इस घोटालेबाज को संरक्षण दे रहे हैं?
आखिर जिला प्रशासन और जिला पंचायत इस गंभीर मामले पर चुप क्यों हैं?
नियमों की बलि चढ़ाने वाले इस कृत्य की उच्च स्तरीय जांच कब शुरू होगी?
## 5. अगले अंक में बड़ा धमाका: सूची के साथ होगा पर्दाफाश!
यह भ्रष्टाचार की कहानी का सिर्फ एक सिरा है। इस महा-फर्जीवाड़े की जड़ें बहुत गहरी हैं। 'क्या कार्रवाई विभाग करेगा और कब होगी जांच?' यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन हम चुप बैठने वाले नहीं हैं।
👉अगले अंक में देखिए विशेष सूची: हमारी अगली खोजी रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि विकासखंड बुढ़ार के किस-किस शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय से गरीब रसोइयों को जबरन हटाया गया और कहां-कहां नियम विरुद्ध तरीके से बैक-डोर से नई नियुक्तियों का अवैध खेल खेला गया।
👉बने रहिए हमारे साथ... बड़ा खुलासा अभी बाकी है!
न्यूज़ वाला पेपर बना दीजिए
शहडोल/बुढ़ार। जिला पंचायत शहडोल के अंतर्गत आने वाले विकासखंड बुढ़ार के जनपद शिक्षा केंद्र (BRC) में भ्रष्टाचार और तानाशाही का एक ऐसा घिनौना खेल सामने आया है, जिसने पूरे शिक्षा विभाग को हिलाकर रख दिया है। पीएम पोषण (मध्यान्ह भोजन) योजना, जो गरीब बच्चों के निवाले से जुड़ी है, उसे भ्रष्टाचार का चारागाह बना दिया गया। 14 वर्षों से एक ही जगह पर मलाई काट रहे और वर्तमान में प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद हटाए गए बीएसी मनोज शुक्ला के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा अब जनता के सामने आ चुका है।
## 1. 14 साल की 'धाक' और नियमों का कत्लेआम कहते हैं कि सरकारी तंत्र में तबादले और नियुक्तियां नियमों के तहत होती हैं, लेकिन जनपद शिक्षा केंद्र बुढ़ार में मनोज शुक्ला ने अपनी ऐसी 'धाक' जमा रखी थी कि शासन के नियम और निर्देश इनके सामने बौने साबित हो रहे थे। पिछले 14 सालों से एक ही जगह जमे रहकर इन्होंने पूरे सिस्टम को अपनी उंगलियों पर नचाया। आखिरकार इनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर इन्हें हटा तो दिया गया, लेकिन इनके द्वारा बोए गए भ्रष्टाचार के कांटे आज भी व्यवस्था को लहूलुहान कर रहे हैं।
## 2. बैक-डोर एंट्री का खेल: नियम विरुद्ध रसोइयों को हटाया और चहेतों को नवाजा
खोजी रिपोर्ट में यह साफ खुलासा हुआ है कि मनोज शुक्ला ने अपने कार्यकाल के दौरान मध्यान्ह भोजन संचालित करने वाले रसोइयों की नियुक्ति और उन्हें हटाए जाने में भारी फर्जीवाड़ा किया।
नियमों को ताक पर रखा: वर्षों से ईमानदारी से काम कर रहे गरीब रसोइयों को बिना किसी ठोस कारण के, नियम विरुद्ध तरीके से नौकरी से निकाल बाहर किया गया।
बैक-डोर से एंट्री: अपने चहेतों और सांठगांठ वाले लोगों को मोटी रकम या प्रभाव के चलते 'बैक डोर' (चोर दरवाजे) से रसोइया के पदों पर नियुक्त कर दिया गया।
## 3. वरिष्ठ अधिकारियों को 'अंधेरे' में रखकर खेला गया गंदा खेल हैरानी की बात यह है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा और कागजी हेरफेर मनोज शुक्ला द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारियों को धोखे में रखकर किया गया। सूत्रों की मानें तो रसोइयों को हटाने और रखने के जो प्रस्ताव जिला पंचायत या वरिष्ठ कार्यालयों को भेजे गए, उनमें तथ्यों को इस तरह मरोड़ा गया कि ऊपर बैठे अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। विभागीय साख को दांव पर लगाकर खेला गया यह खेल सीधे तौर पर एक महा-घोटाले की ओर इशारा करता है।
## 4. खुलासा होने के बाद भी मास्टरमाइंड 'बेफिक्र', तंत्र मौन!
इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ होने के बाद भी सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह है कि—इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड मनोज शुक्ला आज भी बेफिक्र क्यों घूम रहा है? शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इस चेहरे पर अब तक कानून का शिकंजा क्यों नहीं कसा?
क्या विभाग के कुछ और बड़े मगरमच्छ इस घोटालेबाज को संरक्षण दे रहे हैं?
आखिर जिला प्रशासन और जिला पंचायत इस गंभीर मामले पर चुप क्यों हैं?
नियमों की बलि चढ़ाने वाले इस कृत्य की उच्च स्तरीय जांच कब शुरू होगी?
## 5. अगले अंक में बड़ा धमाका: सूची के साथ होगा पर्दाफाश!
यह भ्रष्टाचार की कहानी का सिर्फ एक सिरा है। इस महा-फर्जीवाड़े की जड़ें बहुत गहरी हैं। 'क्या कार्रवाई विभाग करेगा और कब होगी जांच?' यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन हम चुप बैठने वाले नहीं हैं।
👉अगले अंक में देखिए विशेष सूची: हमारी अगली खोजी रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि विकासखंड बुढ़ार के किस-किस शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय से गरीब रसोइयों को जबरन हटाया गया और कहां-कहां नियम विरुद्ध तरीके से बैक-डोर से नई नियुक्तियों का अवैध खेल खेला गया।
👉बने रहिए हमारे साथ... बड़ा खुलासा अभी बाकी है!
न्यूज़ वाला पेपर बना दीजिए
- Get link
- X
- Other Apps
Popular posts
❤️ मेरी मोहब्बत ऐसी है ❤️ | दिल छू लेने वाली रोमांटिक शायरी (2026)
❤️ मेरी मोहब्बत ऐसी है ❤️ | दिल छू लेने वाली रोमांटिक शायरी (2026) – Introduction प्यार एक ऐसा एहसास है, जो हर किसी की जिंदगी में एक खास जगह रखता है। जब दिल किसी के लिए सच्चे जज़्बात महसूस करता है, तो वो अपने आप कह उठता है—मेरी मोहब्बत ऐसी है जो हर हाल में सच्ची और गहरी रहती है। इस पोस्ट में हम आपके लिए लेकर आए हैं दिल छू लेने वाली रोमांटिक शायरी (2026), जो आपके दिल की हर बात को खूबसूरती से बयां करेगी। कभी शब्द कम पड़ जाते हैं, लेकिन एहसास हमेशा साथ रहते हैं। मेरी मोहब्बत ऐसी है जो दिखावे से दूर और सच्चाई से जुड़ी हुई है। ऐसी ही दिल छू लेने वाली रोमांटिक शायरी (2026) आपको अपने प्यार को एक अलग अंदाज में जताने का मौका देती है, जहाँ हर लाइन दिल को छू जाती है। जब किसी की याद हर वक्त दिल में बसी रहे और हर धड़कन उसी का नाम ले, तो समझ आता है कि मोहब्बत कितनी खास होती है। मेरी मोहब्बत ऐसी है जो वक्त और हालात से भी नहीं बदलती। अगर आप भी अपने जज़्बातों को शब्दों में ढालना चाहते हैं, तो ये दिल छू लेने वाली रोमांटिक शायरी (2026) आपके लिए एकदम सही है। क्योंकि आखिर में, सच्चा प्यार वही होता है जो हर...
जैतपुर थाना क्षेत्र में तीन युवकों की संदिग्ध मौत के मामले की जांच अब उमरिया पुलिस अधीक्षक (एसपी) को सौंप दी गई है। शहडोल जोन के आईजी ने स्थानीय पुलिस की जांच पर लगातार उठ रहे सवालों और मृतकों के परिजनों की शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया है।
घटना 13 और 14 अप्रैल की दरमियानी रात की है। कमता गांव में रोहित शर्मा, तनुज शुक्ला और सचिन सिंह के शव एक कुएं से बरामद हुए थे। घटनास्थल के पास उनकी क्षतिग्रस्त कार भी मिली थी। प्रारंभिक जांच में स्थानीय पुलिस ने इसे गांजा तस्करी से जुड़ा मामला बताया था। पुलिस का निष्कर्ष था कि तीनों की मौत सड़क दुर्घटना के बाद कुएं में गिरने से हुई। इस दौरान पुलिस ने कई क्विंटल गांजा और कुछ अन्य तस्करों को भी गिरफ्तार किया था। हालांकि, मृतकों के परिजनों ने पहले दिन से ही पुलिस के इस निष्कर्ष पर सवाल उठाए थे और हत्या की आशंका जताई थी। परिजनों का आरोप था कि पुलिस ने मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की और जांच को सड़क हादसे की दिशा में मोड़ दिया। परिजनों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और राज्य मानवाधिकार आयोग तक शिकायतें भेजी थीं। उनका दावा है कि तीनों युवकों की मौत दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है। परिजनों ने यह भी बताया कि उन्होंने घटना से जुड़े कई अहम तथ्य और संभावित गवाहों की जानकारी पुलिस को दी थी, लेकिन उन बिंदुओं पर गंभीरता से जांच नहीं की गई। इन शिकायतो...