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उत्तरप्रदेश के प्रयागराज से जालसाजी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां की धूमनगंज पुलिस ने एक ऐसे शातिर युवक को गिरफ्तार किया है,
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जो अपने ही दोस्त के सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के ट्रेनिंग सेंटर पहुंच गया।
आरोपी ने न सिर्फ फर्जी दस्तावेज दिखाए, बल्कि राजरूपपुर स्थित RPF सेंटर में एक दिन की ट्रेनिंग भी पूरी कर ली। हालांकि, अगले ही दिन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान उसकी पोल खुल गई।
दोस्त के नियुक्ति पत्र पर बदला नाम और फोटो:
पकड़े गए युवक की पहचान रोहित कुमार के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का रहने वाला है। धूमनगंज थाना प्रभारी धनंजय पांडेय के मुताबिक, आरोपी रोहित के एक दोस्त का चयन RPF में हुआ था। रोहित की नीयत खराब हुई और उसने अपने दोस्त के नियुक्ति पत्र में एडिटिंग कर दी। उसने पत्र से दोस्त का नाम, फोटो और जीटीपी डिटेल्स बदलकर अपनी जानकारी डाल दी और उसका रंगीन प्रिंटआउट निकाल लिया।
एक दिन की ट्रेनिंग भी की पूरी:
फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर रोहित राजरूपपुर स्थित RPF ट्रेनिंग सेंटर पहुंच गया। शुरुआती दौर में वहां मौजूद स्टाफ का ध्यान इस चालाकी पर नहीं गया और उसे अंदर प्रवेश मिल गया। हद तो तब हो गई जब उसने सेंटर में एक दिन की ट्रेनिंग भी बकायदा पूरी कर ली।
फर्जी कॉल लेटर बनाना यू ट्यूब पर सीखा:
उसने पुलिस को बताया, उसका एक दोस्त आरएएफ में है। उससे संपर्क कर उसने यह जानकारी ली कि ज्वाइनिंग के समय कौन कौन से डॉक्युमेंट्स लगते हैं। इसके बाद उसने इंटरनेट से आरएएफ कांस्टेबल रिक्रूटमेंट का कॉल लेटर सर्च किया। फिर एआई एप्लीकेशन के जरिए अपने नाम वाला फेक कॉल लेटर तैयार किया।
इसमें नाम, पिता का नाम जैसे पर्टिकुलर तो अपने रखे लेकिन रोल नंबर उस चयनित अभ्यर्थी का अंकित कर दिया, जो वास्तव में चयनित था। इस अभ्यर्थी का नाम रोहित पुत्र बलराज था।
ऑनलाइन वेरिफिकेशन से खुली पोल:
जालसाजी का यह खेल ज्यादा दिन नहीं चल सका। दूसरे दिन जब विभाग द्वारा ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शुरू की गई, तो रोहित के फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हो गया। ऑनलाइन रिकॉर्ड में उस रोल नंबर और नाम का मिलान नहीं हुआ। गड़बड़ी पकड़ में आते ही RPF के अधिकारियों ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया और धूमनगंज पुलिस के हवाले कर दिया।जिसके बाद युवक ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। और पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया है।
#indianarmy
जो अपने ही दोस्त के सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के ट्रेनिंग सेंटर पहुंच गया।
आरोपी ने न सिर्फ फर्जी दस्तावेज दिखाए, बल्कि राजरूपपुर स्थित RPF सेंटर में एक दिन की ट्रेनिंग भी पूरी कर ली। हालांकि, अगले ही दिन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान उसकी पोल खुल गई।
दोस्त के नियुक्ति पत्र पर बदला नाम और फोटो:
पकड़े गए युवक की पहचान रोहित कुमार के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का रहने वाला है। धूमनगंज थाना प्रभारी धनंजय पांडेय के मुताबिक, आरोपी रोहित के एक दोस्त का चयन RPF में हुआ था। रोहित की नीयत खराब हुई और उसने अपने दोस्त के नियुक्ति पत्र में एडिटिंग कर दी। उसने पत्र से दोस्त का नाम, फोटो और जीटीपी डिटेल्स बदलकर अपनी जानकारी डाल दी और उसका रंगीन प्रिंटआउट निकाल लिया।
एक दिन की ट्रेनिंग भी की पूरी:
फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर रोहित राजरूपपुर स्थित RPF ट्रेनिंग सेंटर पहुंच गया। शुरुआती दौर में वहां मौजूद स्टाफ का ध्यान इस चालाकी पर नहीं गया और उसे अंदर प्रवेश मिल गया। हद तो तब हो गई जब उसने सेंटर में एक दिन की ट्रेनिंग भी बकायदा पूरी कर ली।
फर्जी कॉल लेटर बनाना यू ट्यूब पर सीखा:
उसने पुलिस को बताया, उसका एक दोस्त आरएएफ में है। उससे संपर्क कर उसने यह जानकारी ली कि ज्वाइनिंग के समय कौन कौन से डॉक्युमेंट्स लगते हैं। इसके बाद उसने इंटरनेट से आरएएफ कांस्टेबल रिक्रूटमेंट का कॉल लेटर सर्च किया। फिर एआई एप्लीकेशन के जरिए अपने नाम वाला फेक कॉल लेटर तैयार किया।
इसमें नाम, पिता का नाम जैसे पर्टिकुलर तो अपने रखे लेकिन रोल नंबर उस चयनित अभ्यर्थी का अंकित कर दिया, जो वास्तव में चयनित था। इस अभ्यर्थी का नाम रोहित पुत्र बलराज था।
ऑनलाइन वेरिफिकेशन से खुली पोल:
जालसाजी का यह खेल ज्यादा दिन नहीं चल सका। दूसरे दिन जब विभाग द्वारा ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शुरू की गई, तो रोहित के फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हो गया। ऑनलाइन रिकॉर्ड में उस रोल नंबर और नाम का मिलान नहीं हुआ। गड़बड़ी पकड़ में आते ही RPF के अधिकारियों ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया और धूमनगंज पुलिस के हवाले कर दिया।जिसके बाद युवक ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। और पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया है।
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जैतपुर थाना क्षेत्र में तीन युवकों की संदिग्ध मौत के मामले की जांच अब उमरिया पुलिस अधीक्षक (एसपी) को सौंप दी गई है। शहडोल जोन के आईजी ने स्थानीय पुलिस की जांच पर लगातार उठ रहे सवालों और मृतकों के परिजनों की शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया है।
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