लाचारी का दस्तावेज: आदेश कम, अधिकारियों की 'प्रार्थना' ज्यादा
इस पूरे मामले में सबसे हास्यास्पद और चौंकाने वाला पहलू प्रबंधन द्वारा जारी किया गया वह आदेश है, जो आदेश कम और एक बेबस अपील या प्रार्थना पत्र अधिक नजर आता है। 41 कर्मचारियों की सूची जारी करते हुए उन्हें अंडरग्राउंड खदान में काम करने का जो निर्देश दिया गया है, उसकी भाषा देखकर ऐसा लगता है मानो अधिकारी इन वीआईपी कर्मचारियों के सामने हाथ जोड़कर काम पर जाने की मिन्नतें कर रहे हों। एक कड़क प्रशासनिक आदेश की जगह ऐसी प्रार्थनापूर्ण भाषा का इस्तेमाल खुद-ब-खुद यह बयां करता है कि इन कर्मचारियों के पीछे कितनी बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक ताकतों का हाथ है, जिनके आगे सोहागपुर एरिया के आला अधिकारी भी नतमस्तक नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग तंज कस रहे हैं कि क्या अधिकारियों को इन बाबुओं से काम भी भीख मांगकर लेना पड़ रहा है?
मुख्य प्रबंधक बी.के. जेना और संजय सिंह की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस पूरे भ्रष्टाचार और वीआईपी संस्कृति को प्रश्रय देने के लिए सोहागपुरिया के मुख्य प्रबंधक बी.के. जेना और बंगवार के उप क्षेत्रीय प्रबंधक संजय सिंह सीधे तौर पर कटघरे में खड़े नजर आ रहे हैं। इन दोनों शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ खान प्रबंधक (माइंस मैनेजर) की भूमिका पर भी गंभीर उंगलियां उठ रही हैं। क्षेत्र की जनता और श्रमिक संगठनों का आरोप है कि आखिर इन अधिकारियों की नाक के नीचे इतने लंबे समय से 41 लोग बिना अंडरग्राउंड ड्यूटी किए लाखों रुपये का वेतन कैसे पा रहे थे? क्या इन अधिकारियों की ढुलमुल कार्यप्रणाली के कारण इन्हें छूट मिली हुई थी, जिसके कारण इन्होंने नियमों को ताक पर रख दिया? इन तीनों जिम्मेदारों को टारगेट करते हुए अब विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।
सार्वजनिक धन की खुली लूट: कोल इंडिया के वीआईपी कल्चर का अंत कब?
इस खुलासे ने कोल इंडिया जैसी महारत्न कंपनी के भीतर चल रहे उस काले सच को उजागर कर दिया है, जहां एक तरफ साधारण मजदूर जान जोखिम में डालकर देश को रोशन करने के लिए कोयला निकालता है, तो दूसरी तरफ रसूखदारों के चहेते सरफेस पर बैठकर मौज-मस्ती का पैसा लेते हैं। सोशल मीडिया पर लोग खुल कर लिख रहे हैं कि यह कोल इंडिया के इतिहास का सबसे शर्मनाक चेहरा है। समय रहते यह कदम भले ही उठाया गया हो, लेकिन जनता इस बात का पूरा हिसाब मांग रही है कि अब तक जो नुकसान खदान को हुआ और जो जानें गईं, उसका जिम्मेदार कौन है? उच्च प्रबंधन से यह मांग की जा रही है कि केवल इन 41 कर्मचारियों को अंडरग्राउंड भेजने का दिखावटी पत्र जारी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि बी.के. जेना, संजय सिंह और संबंधित खान प्रबंधक पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने इस भ्रष्टाचार को इतने समय तक पल्लवित होने दिया।
मुख्य प्रबंधक बी.के. जेना और संजय सिंह की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस पूरे भ्रष्टाचार और वीआईपी संस्कृति को प्रश्रय देने के लिए सोहागपुरिया के मुख्य प्रबंधक बी.के. जेना और बंगवार के उप क्षेत्रीय प्रबंधक संजय सिंह सीधे तौर पर कटघरे में खड़े नजर आ रहे हैं। इन दोनों शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ खान प्रबंधक (माइंस मैनेजर) की भूमिका पर भी गंभीर उंगलियां उठ रही हैं। क्षेत्र की जनता और श्रमिक संगठनों का आरोप है कि आखिर इन अधिकारियों की नाक के नीचे इतने लंबे समय से 41 लोग बिना अंडरग्राउंड ड्यूटी किए लाखों रुपये का वेतन कैसे पा रहे थे? क्या इन अधिकारियों की ढुलमुल कार्यप्रणाली के कारण इन्हें छूट मिली हुई थी, जिसके कारण इन्होंने नियमों को ताक पर रख दिया? इन तीनों जिम्मेदारों को टारगेट करते हुए अब विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।
सार्वजनिक धन की खुली लूट: कोल इंडिया के वीआईपी कल्चर का अंत कब?
इस खुलासे ने कोल इंडिया जैसी महारत्न कंपनी के भीतर चल रहे उस काले सच को उजागर कर दिया है, जहां एक तरफ साधारण मजदूर जान जोखिम में डालकर देश को रोशन करने के लिए कोयला निकालता है, तो दूसरी तरफ रसूखदारों के चहेते सरफेस पर बैठकर मौज-मस्ती का पैसा लेते हैं। सोशल मीडिया पर लोग खुल कर लिख रहे हैं कि यह कोल इंडिया के इतिहास का सबसे शर्मनाक चेहरा है। समय रहते यह कदम भले ही उठाया गया हो, लेकिन जनता इस बात का पूरा हिसाब मांग रही है कि अब तक जो नुकसान खदान को हुआ और जो जानें गईं, उसका जिम्मेदार कौन है? उच्च प्रबंधन से यह मांग की जा रही है कि केवल इन 41 कर्मचारियों को अंडरग्राउंड भेजने का दिखावटी पत्र जारी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि बी.के. जेना, संजय सिंह और संबंधित खान प्रबंधक पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने इस भ्रष्टाचार को इतने समय तक पल्लवित होने दिया।
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