मोहन यादव जी आज गुजरात लॉबी के सामने दंडवत प्रणाम करते हुए नतमस्तक हैं।




जिस मध्य प्रदेश ने सरदार सरोवर परियोजना के लिए अपनी ज़मीन दी, अपने जंगल दिए, अपने गाँव डुबोए और लाखों लोगों का विस्थापन झेला, उसी मध्य प्रदेश सरकार ने गुजरात सरकार से 7,669 करोड़ रुपये का मुआवज़ा माँगा था।

लेकिन मोहन यादव जी ने प्रदेश के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय गुजरात सरकार से समझौता कर लिया और अब उल्टा 550 करोड़ रुपये गुजरात को देने पर सहमति जता दी।

माँ नर्मदा का उद्गम मध्य प्रदेश में है और इसका अधिकांश प्रवाह भी यहीं है। फिर भी प्रदेश के अनेक हिस्से आज भी सिंचाई और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, गाँवों तक नहरें नहीं पहुँचतीं, लेकिन हमारे हिस्से का पानी और हमारे संसाधनों का लाभ कहीं और पहुँच जाता है।

पूरा प्रदेश देख रहा है कि किस तरह आज मोहन सरकार ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के सामने मध्य प्रदेश के हितों से समझौता कर लिया।


जिस मध्य प्रदेश ने सरदार सरोवर परियोजना के लिए अपनी ज़मीन दी, अपने जंगल दिए, अपने गाँव डुबोए और लाखों लोगों का विस्थापन झेला, उसी मध्य प्रदेश सरकार ने गुजरात सरकार से 7,669 करोड़ रुपये का मुआवज़ा माँगा था।

लेकिन मोहन यादव जी ने प्रदेश के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय गुजरात सरकार से समझौता कर लिया और अब उल्टा 550 करोड़ रुपये गुजरात को देने पर सहमति जता दी।

माँ नर्मदा का उद्गम मध्य प्रदेश में है और इसका अधिकांश प्रवाह भी यहीं है। फिर भी प्रदेश के अनेक हिस्से आज भी सिंचाई और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, गाँवों तक नहरें नहीं पहुँचतीं, लेकिन हमारे हिस्से का पानी और हमारे संसाधनों का लाभ कहीं और पहुँच जाता है।

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