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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने बुधवार को चेन्नई के सरकारी अस्पताल का दौरा किया। CM बनने के बाद विजय का यह पहला अस्पताल दौरा रहा, यह दौरा सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो के कुछ दिनों बाद हुआ, जिसमें सरकारी अस्पताल में रिश्वतखोरी, खराब साफ-सफाई और सुविधाओं की कमी के आरोप लगाया गया था।
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एक सरकारी विज्ञापन में इस दौरे को इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ का बिना पहले से तय अचानक निरीक्षण बताया गया। दौरे के दौरान, मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से बातचीत की, अस्पताल की सुविधाओं का जायजा लिया और अस्पताल में भर्ती बच्चों के माता-पिता से बात की।
सरकार द्वारा जारी तस्वीरों में विजय नवजात बच्चों को गोद में लिए, उनकी माताओं से बातचीत करते और मेडिकल स्टाफ के साथ मुद्दों पर चर्चा करते हुए दिखे।
यह दौरा एक महिला के सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने के कुछ दिनों बाद हुआ है। इस विडियो में महिला ने दावा किया था कि वह गरीबी परिवार से है। महिला ने आरोप लगाया था कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उससे रिश्वत मांगी, समय पर खाना नहीं दिया गया और बुनियादी सुविधाओं से अछूता रखा।
आरोपों पर जवाब देते हुए, तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अरुण राज ने कहा था कि इस मामले में आरोपी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि मरीजों और आने वाले लोगों से मिली प्रतिक्रिया से पता चला है कि अस्पताल में टॉयलेट, ज्यादा वार्ड और एक कैंटीन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के उपायों पर विचार करेगी।
मुख्यमंत्री के दौरे की खबर सुनकर अस्पताल के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई; समर्थक और आम लोग अस्पताल में इकट्ठा हो गए। निरीक्षण के दौरान भीड़ को संभालने के लिए सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे।
इस दौरे का राजनीतिक एंगल भी है। महिलाओं और बच्चों को विजय का अहम समर्थक वर्ग माना जाता है। इन वर्गों के बीच उनकी लोकप्रियता को 'तमिलगा वेट्री कझगम' के चुनावी प्रदर्शन में बड़ी भूमिका निभाने वाला माना जाता है, जिससे पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और सरकार बनाने में सफल रही।
#Chennai #CMVijay #DainikJagran
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शहडोल में बीजेपी ओबीसी मोर्चा की सूची पर बवाल, रात में बने जिला उपाध्यक्ष, सुबह सूची से नाम गायब, भाजपा नेता ने लगाए राजनीतिक दबाव के आरोप
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घर में नीम का पेड़ लगाना चाहिए या नहीं? जानिए 10 फायदे और सही दिशा (2026)
नीम भारतीय मूल का एक पर्ण- पाती वृक्ष है। यह सदियों से समीपवर्ती देशों- पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, म्यानमार, थाईलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका आदि देशों में पाया जाता रहा है। 🌿 नीम का पेड़ – एक परिचय नीम का पेड़, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Azadirachta indica कहते हैं, भारत और दक्षिण एशिया का एक जादुई औषधीय पेड़ है। इसे लोग “घर का डॉक्टर” या “जंगल का हर्बल खजाना” भी कहते हैं। नीम सिर्फ पेड़ नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सुंदरता और घरेलू उपयोग का खजाना है। नीम क्यों खास है? इसके पत्ते, बीज, छाल, फूल और तेल – हर हिस्सा अद्भुत गुणों से भरा हुआ है। यह रोगों से लड़ने, कीट और मच्छर भगाने, और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। नीम का स्वाद थोड़ा कड़वा जरूर है, लेकिन इसके फायदे कहानी की तरह गहरे हैं। 1️⃣ स्वास्थ्य में नीम के चमत्कार त्वचा के लिए वरदान: मुहांसे, दाने, खुजली, फोड़े – नीम की पत्तियों का फेस पैक इन्हें दूर करता है। बालों के लिए ताजगी: डैंड्रफ, बाल झड़ना, रूखे बाल – नीम तेल और पाउडर इसे रोकते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए: नीम का नियमित सेवन शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। रक्...
MPPSC Success: उमरिया की बेटी Yashu Tiwari बनीं Mining Inspector, Chandia में हुआ Grand Welcome
उमरिया की बेटी यशु तिवारी बनीं MPPSC खनिज निरीक्षक, चंदिया में हुआ भव्य स्वागत उमरिया, मध्य प्रदेश: जिले के चंदिया नगर की रहने वाली 24 वर्षीय यशु तिवारी ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर खनिज निरीक्षक (Mining Inspector) का पद प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। अपने चयन के बाद जब यशु तिवारी पहली बार अपने गृह नगर चंदिया पहुंचीं, तो नगरवासियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूलों की वर्षा और लोगों के उत्साह ने इस पल को यादगार बना दिया। परिजनों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर शिक्षकों ने भी यशु तिवारी का शॉल, श्रीफल और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया। उन्होंने कहा कि यशु की सफलता यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। बेटी की इस उपलब्धि पर पिता सतीश कांत तिवारी और माता रंजना तिवारी भावुक नजर आए। उन्होंने अपनी बेटी की सफलता को वर्षों की मेहनत और परिवार के सहयोग का परिणाम बताया। यशु तिवार...
Successmee2 breaking news बुढ़ार की सड़कों की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन? जनता कब तक झेलेगी गड्ढों की परेशानी
बुढ़ार की सड़कों की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन? जनता कब तक झेलेगी गड्ढों की परेशानी बुढ़ार की सड़कों की दुर्दशा को लेकर जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीर में सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे, पानी और उखड़ी हुई सड़क दिखाई दे रही है। ऐसी स्थिति में दोपहिया वाहन चालकों, पैदल यात्रियों और चार पहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बारिश के दौरान सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि बुढ़ार की खराब सड़कों के लिए जिम्मेदार कौन है? सड़क की मरम्मत कब होगी और संबंधित विभाग इस समस्या का समाधान कब करेगा? बुढ़ार की सड़कों की हालत पर उठ रहे सवाल सड़क किसी भी शहर और कस्बे के विकास की महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधा है। अच्छी सड़क से आवागमन आसान होता है और व्यापार तथा स्थानीय गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है। लेकिन सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे और पानी जमा होने की स्थिति लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। तस्वीर में सड़क की खराब स्थिति दिखाई दे रही है। हालांकि केवल फोटो या वीडियो...
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15 अगस्त 2026: भारत की आजादी में भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और सुभाष चंद्र बोस का योगदान 15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। यह दिन हमें उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों और आम भारतीयों के संघर्ष की याद दिलाता है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता के लिए अलग-अलग तरीकों से योगदान दिया। भारत की आजादी की कहानी में भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महान व्यक्तित्वों का नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। इन तीनों नेताओं के रास्ते अलग-अलग थे, लेकिन उनके सामने एक बड़ा लक्ष्य था—भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना। भगत सिंह ने क्रांतिकारी विचारों और युवाओं में जागरूकता के माध्यम से प्रभाव डाला, चंद्रशेखर आजाद ने क्रांतिकारी संगठन को मजबूत किया और सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के माध्यम से ब्रिटिश शासन को चुनौती दी। भारत की आजादी का संघर्ष कितना लंबा था? भारत की स्वतंत्रता का संघर्ष कई दशकों तक चला। 1857 का विद्रोह, सामाजिक और राजनीतिक जागरण, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन और क्...
अमलाई से शारदा OCM कितनी दूर है? जानें दूरी, लोकेशन और पहुंचने का रास्ता
अमलाई से शारदा OCM कितनी दूर है? जानें दूरी, लोकेशन और पहुंचने का रास्ता अमलाई (शहडोल): शारदा ओपन कास्ट माइंस (Sharda OCM) दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की एक महत्वपूर्ण कोयला खदान है। यह अमलाई क्षेत्र के पास स्थित है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं वाहन आते-जाते हैं। अमलाई से शारदा OCM की दूरी अमलाई रेलवे स्टेशन या मुख्य बाजार से शारदा OCM की सड़क मार्ग से दूरी लगभग 4 से 6 किलोमीटर है। यह दूरी आपके शुरुआती स्थान के अनुसार थोड़ी कम या ज्यादा हो सकती है। सामान्यतः यहां पहुंचने में लगभग 10 से 15 मिनट का समय लगता है। शारदा OCM कहां स्थित है? शारदा OCM मध्य प्रदेश के शहडोल क्षेत्र में स्थित SECL की ओपन कास्ट कोयला परियोजनाओं में से एक है। पर्यावरण स्वीकृति दस्तावेज़ों में इसका स्थान अमलाई तहसील के बाखो और बाखी गांवों के आसपास बताया गया है। कैसे पहुंचें? अमलाई रेलवे स्टेशन से ऑटो या निजी वाहन द्वारा। अमलाई मुख्य बाजार से सड़क मार्ग द्वारा। स्थानीय लोगों से शारदा OCM का रास्ता आसानी से पूछा जा सकता है। FAQ अमलाई से शारदा OCM कितनी दूर है...
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