SECL सोहागपुर एरिया की बंगवार खदान में बड़ा खेल; 41 'VIP' कर्मचारियों की फौज जमीन पर काट रही थी मलाई, अंडरग्राउंड में मौत से जूझ रहे थे असली मजदूर!

​भ्रष्टाचार का लाइव प्रमाण: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ आदेश पत्र
कॉल इंडिया की अनुषंगी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के सोहागपुर एरिया अंतर्गत आने वाली छोटी सी बंगवार भूमिगत खदान से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रबंधन की साख को तार-तार कर दिया है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक विभागीय पत्र तेजी से वायरल हो रहा है। यह पत्र कोई सामान्य प्रशासनिक पत्राचार नहीं, बल्कि कोल इंडिया में जड़ जमा चुके वीआईपी कल्चर और अंदरूनी भ्रष्टाचार का एक बड़ा और पुख्ता दस्तावेज माना जा रहा है। इस वायरल पत्र (जिसका पत्र क्रमांक और जारी होने की तिथि प्रबंधन की लाचारी को बयां करती है) ने यह साबित कर दिया है कि किस तरह नियम-कानूनों को ताक पर रखकर चहेतों को उपकृत किया जाता है। आम जनता और खदान के अन्य श्रमिक सोशल मीडिया पर इस पत्र को लेकर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं और तीखे सवाल पूछ रहे हैं।
​41 'आरामपसंद' वीआईपी कर्मचारियों की फौज और लाखों का मुफ्त वेतन
आमतौर पर किसी भी भूमिगत खदान में सबसे कठिन और जोखिम भरा काम अंडरग्राउंड (जमीन के नीचे) होता है, जहां कोयला उत्पादन की मुख्य जिम्मेदारी होती है। लेकिन बंगवार माइंस में एक, दो या चार नहीं, बल्कि पूरे 41 स्थाई कर्मचारियों की एक ऐसी फौज तैनात थी, जो केवल कागजों पर या माइंस के ऊपरी हिस्से (सरफेस) में महज औपचारिक हाजिरी लगाकर कोल इंडिया से हर महीने लाखों रुपये का भारी-भरकम वेतन डकार रही थी। सूत्र बताते हैं कि ये सभी कर्मचारी किसी न किसी वीआईपी कोटे या रसूखदार नेताओं-अधिकारियों की सिफारिश पर जमीन के ऊपर आराम फरमा रहे थे, जबकि इन्हें खदान के भीतर मुख्य कार्यों में सहयोग के लिए नियुक्त किया गया था। यह सीधे तौर पर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और कोल इंडिया के भीतर चल रहे गहरे भ्रष्टाचार का जीवंत उदाहरण है।

ये है स्पेशल 41 में शामिल

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के बंगवार खदान आदेश में शामिल सभी 41 कर्मचारियों के नाम और उनके पद जो अब तक सिफ़ारिश पर टिके हुए हुए थे, इनमें गेंद लाल (बी.सी.एम.), गोविंद प्रसाद (बेल्ट ऑपरेटर), संत लाल (ड्रिलर), देवेंद्र जायसवाल (जी/असिस्टेंट), अनिल कुमार (जी/असिस्टेंट), रवि कुमार (जी/असिस्टेंट), देवीदत्त पांडेय (जी/असिस्टेंट), अजीत कुमार (जी/असिस्टेंट), राकेश लाल गुप्ता (जी/असिस्टेंट), कैलाशपति त्रिपाठी (जी/असिस्टेंट), आशुतोष कु. शुक्ला (जी/असिस्टेंट), दीपांकर कुर्रे (जी/असिस्टेंट), सायरास भावुक (जी/असिस्टेंट), बृजेंद्र कुमार कुशवाहा (जी/असिस्टेंट), अनुज कुमार शर्मा (जी/असिस्टेंट), मो. हसनैन खान (जी/असिस्टेंट), केदार यादव (जी/असिस्टेंट), अविनाश द्विवेदी (जी/असिस्टेंट), सत्यनारायण त्रिपाठी (जी/असिस्टेंट), विजय कुमार (जी/असिस्टेंट), कमल सिंह (जी/असिस्टेंट), अजीत कुमार सिंह (जी/असिस्टेंट), अतुल कुमार मिश्रा (जी/असिस्टेंट), भुवनेश्वर कुशवाहा (जी/असिस्टेंट), श्रीराम द्विवेदी (जी/असिस्टेंट), शारदा मिश्रा (जी/असिस्टेंट), रौनक वर्मा (जी/असिस्टेंट), ऋषभ मिश्रा (जी/असिस्टेंट), सेजन अंसारी (जी/असिस्टेंट), पंकज कुमार शुक्ला (जी/असिस्टेंट), सूरज कुमार सोनी (जी/असिस्टेंट), सुधीर कुमार शर्मा (जी/असिस्टेंट), रोहित सिंह (जी/असिस्टेंट), अनिकेत द्विवेदी (जी/असिस्टेंट (प्रशिक्षु)), नवीन कुमार खंडेलवाल (हॉलेज ऑपरेटर), अमरीका प्रसाद 2106 (एम/फिटर), सज्जन सिंह 1721 (एम/फिटर), केवल चंद 411 (एम/फिटर), प्रीतम लाल 1391 (एम/फिटर), संजीव कुमार (एम/फिटर), अवधेश प्रसाद 1679 (एस.बी.ए.) आदि शामिल हैं।

​हादसों की गवाह बंगवार माइंस

समय रहते चेतते तो न जातीं मासूम जानें
यह वही बंगवार माइंस है जो पूर्व में हुए दर्दनाक हादसों के लिए कुख्यात रही है। चाल (खदान की छत) धंसने और अन्य तकनीकी लापरवाही के कारण यहां पहले भी कई खदान श्रमिकों की अकाल मौत हो चुकी है। अब स्थानीय लोगों और श्रमिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यदि समय रहते इन 41 कर्मचारियों को, जो ऊपर बैठकर सिर्फ घूमने-फिरने, आराम करने और फ्री की सैलरी लेने का काम कर रहे थे, खदान के भीतर मुख्य कार्यों में लगाया जाता, तो शायद मैनपावर की कमी के कारण होने वाले वे गंभीर हादसे रोके जा सकते थे। लोगों का स्पष्ट कहना है कि अगर इन वीआईपी लोगों को समय पर नीचे डाला जाता और सुरक्षा व उत्पादन कार्यों में इनका सही उपयोग होता, तो उन मासूम और गरीब मजदूरों की मौत नहीं होती जो खदान के भीतर दिन-रात मौत से जूझते हैं।

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