Dhire-dhire dur jaane lage ho-धिरे-धीरे दूर जाने लगे हो,
तू बेवफ़ा निकली तो क्या,
हम नगमे वफ़ा का गाते रहेंगे।
गम चाहे जितना भी हो तेरे बिछड़ जाने का,
अंदर छुपा के मुश्कराते रहेंगे।।
धिरे-धीरे दूर जाने लगे हो,
किसी के करीब आये हो क्या?
पहले तो बेख्याली में भी ख्याल रखते थे,
अब रक़ीब निये बनाये हो क्या?
~नवीन ज्योति✒️✒️
वो भी रोइ होगी घूँघट की औड़ से,लोग समझते होंगे
बाबुल से बिछड़ने का गम है।
ऐ मेरे रब आकर केह क्यों नहीं दिए तभी जमाने से
उसके रोने की वजह हम है।।
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Bahut hashin hai gav- बहुत हसीन है मेरा गांव
Dil bekarar sahi udas nhi- दिल बेकरार सही उदास नहीं
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Jangle ka sukha darkat-जंगल का सूखा दरखत

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