असंगठित कामगार प्रदेश सचिव प्रदीप द्विवेदी जी का |अनूपपुर |आगमन पर भव्य स्वागत
तू बेवफ़ा निकली तो क्या,
हम नगमे वफ़ा का गाते रहेंगे।
गम चाहे जितना भी हो तेरे बिछड़ जाने का,
अंदर छुपा के मुश्कराते रहेंगे।।
धिरे-धीरे दूर जाने लगे हो,
किसी के करीब आये हो क्या?
पहले तो बेख्याली में भी ख्याल रखते थे,
अब रक़ीब निये बनाये हो क्या?
~नवीन ज्योति✒️✒️
वो भी रोइ होगी घूँघट की औड़ से,लोग समझते होंगे
बाबुल से बिछड़ने का गम है।
ऐ मेरे रब आकर केह क्यों नहीं दिए तभी जमाने से
उसके रोने की वजह हम है।।
Bahut hashin hai gav- बहुत हसीन है मेरा गांव
Dil bekarar sahi udas nhi- दिल बेकरार सही उदास नहीं
Bas baith jau aur tera mera hath ho- बस बैठ जाऊ और तेरा मेरा हाथ हो
Yaade sameta kro, baate rhne diya karo-यादे समेटा करो बाते रहने दिया करो
Jangle ka sukha darkat-जंगल का सूखा दरखत
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