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Showing posts from August, 2020

Teri chahat me-तेरी चाहत में

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 तेरी चाहत में तसव्वुर ये कर लिया मैंने,  तेरी ग़ज़ल को हमसाया बना लिया मैंने।  तेरे दिये हुए ख़त-ओ-फूल को ऐ हमदम,  तेरे आरिज़ का अक्स समझ चूम लिया मैंने।  तेरी तारीफ़ों के ग़ुचों से सजाया हर पल, तेरे नाम को हर सांस पर लिख लिया मैंने। तेरा मसरूफ़ रहना और मेरा रहना मुन्तज़िर,  तेरे बिन ये शाम भी गुज़ार ही लिया मैंने।  तेरी उल्फ़त में सुर्ख़-रु है इरफ़ान,  तेरी याद से उम्र भर का सौदा कर लिया मैंने। —𝓘𝓻𝓯𝓪𝓷 ¬🖤 Read more post Bahut hashin hai gav- बहुत हसीन है मेरा गांव Dil bekarar sahi udas nhi- दिल बेकरार सही उदास नहीं Bas baith jau aur tera mera hath ho- बस बैठ जाऊ और तेरा मेरा हाथ हो Yaade sameta kro, baate rhne diya karo-यादे समेटा करो बाते रहने दिया करो Jangle ka sukha darkat-जंगल का सूखा दरखत Kaas ki shimat jaati duriya-काश की सिमट जाती दूरिया E-rab kuchh aisa-ऐ रब कुछ ऐसा

Tumhare bagair-तुम्हारे बग़ैर

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 अब जो नहीं रह गए हम तुम्हारे बग़ैर,  काश तुम्हें भी हो कमी हमारी हमारे बग़ैर!  अपना सफ़र यूँ ही करना है मुकम्मल, कुछ याद  के सहारे  कुछ याद के  बग़ैर! अब क्या कहें हमें पीना है जाम-ए-ग़म,  कभी अश्क बहा के कभी अश्कों के बग़ैर!  आव देखों ये शमा कितनी है इज़्तिराब में,  किस तरह गुज़रे गी शाम हमारी तुम्हारे बग़ैर!  आज जो एहसास काग़ज़ पर हैं इरफ़ान के,  कहाँ होते ना जाने ये सारे अल्फ़ाज़ तुम्हारे बग़ैर!  اب جو  نہیں  رہ گئے ہم  تمہارے  بغیر،  کاش تمہیں بھی ہو ہماری کمی ہمارے بغیر! اپنا  سفر   یوں ہی   کرنا ہے   مکمل، کچھ یاد کہ سہارے کچھ یاد کہ بغیر! اب  کیا   کہیں   ہمیں پینا ہے   جامِ غم،  کبھی اشک بہا کہ کبھی اشکوں کہ بغیر! آؤ دیکھوں یہ شما کتنی ہے اضطراب میں،  کس طرح گزرے گی شام ہماری تمہارے بغیر!  آج جو احساس کاغذ پر ہیں عرفان کہ،  کہاں ہوتے نا جانے یہ سارے الفاظ تمہارے بغیر! Read more post Bahut hashin hai gav- ब...

माँ की नन्हा सा आँचल हमें भूमण्डल से पियारा लगे-ma ka nanha sa achal hame, bhumandal se pyara lage

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जब मैं छोटा था,  अपने परवरिश से अनजाना था,  माँ की नन्हा सा आँचल हमें भूमण्डल से पियारा था .  जब मैं छोटा था! जब मैं छोटा था,  घुटनों के सहारे चलते -चलते थक कर कहीं भी सो जाया करता था,  फिर अगर आँखे खुली तो, माँ की गोदी का एक सहारा था,  जब मैं छोटा था! जब मैं छोटा था,  मुझे नजर ना लगे किसी की,  सोच कर नन्हे हाथ-पैर एवं गला काले धागों से बंधा रेहता था,  जब मैं छोटा था! जब मैं छोटा था,   कार्बनिक पदार्थ से बना काजल,  छोटे मुखौटे पे पोता रेहता था,  भूमि पर उतरता नहीं पाँव मेरा,  बारी -बारी से सब के गोदी जाते रेहता था,  जब मैं छोटा था ! जब मैं छोटा था,  माँ के गोद को कायनात, एवं एक बूंद दूध को अपनी जिंदगी समझता था,  जब मैं छोटा था!!!  --नवीन ज्योति  (मधेपुरा) Read more post  maa - मेरी माँ  Bahut hashin hai gav- बहुत हसीन है मेरा गांव Dil bekarar sahi udas nhi- दिल बेकरार सही उदास नहीं Bas baith jau aur tera mera hath ho- बस बैठ जाऊ और तेरा मेरा हाथ हो Yaade sameta kro, baate rhne diya k...

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