बेटियाँ उन्हीं की होती हैं, जो उन्हें बोझ नहीं, बल्कि रब की सबसे खूबसूरत अमानत समझते हैं
✍️ लेखक: इरफ़ान आलम
बेटियाँ सिर्फ़ एक संतान नहीं होतीं, बल्कि घर की रहमत, बरकत और मुस्कुराहट होती हैं। जिस घर में बेटी जन्म लेती है, वहाँ खुशियों की एक नई किरण आती है। उसकी मासूम हँसी पूरे आँगन को रोशन कर देती है और उसकी मौजूदगी परिवार के रिश्तों में मोहब्बत घोल देती है।
अफसोस की बात है कि आज भी समाज के कुछ लोग बेटियों को बोझ समझ लेते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि बेटी कभी बोझ नहीं होती, बल्कि रब की वह अनमोल अमानत होती है जिसे संभालने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता। बेटियाँ अपने माता-पिता का मान-सम्मान बढ़ाती हैं, परिवार को जोड़कर रखती हैं और अपने प्यार से हर रिश्ते को मजबूत बनाती हैं।
इस्लाम ने भी बेटियों को बहुत ऊँचा दर्जा दिया है। बेटियों के साथ प्यार, रहम और इंसाफ़ का व्यवहार करने की शिक्षा दी गई है। एक बेटी अपने पिता के लिए रहमत होती है, अपनी माँ की सहेली होती है और पूरे परिवार की खुशी का कारण बनती है।
बेटियों को केवल अच्छी परवरिश ही नहीं, बल्कि अच्छी शिक्षा, सम्मान और अपने सपनों को पूरा करने का अधिकार भी मिलना चाहिए। उन्हें यह एहसास होना चाहिए कि वे किसी से कम नहीं हैं। जब एक बेटी पढ़ती है, आगे बढ़ती है और अपने पैरों पर खड़ी होती है, तो वह सिर्फ़ अपना नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज का भविष्य बदल देती है।
जो माता-पिता अपनी बेटियों को प्यार, भरोसा और सम्मान देते हैं, वे वास्तव में रब की इस अमानत की हिफाज़त करते हैं। बेटी की मुस्कान किसी भी दौलत से बड़ी होती है और उसकी दुआएँ माता-पिता के लिए सबसे कीमती तोहफ़ा होती हैं।
आज ज़रूरत इस बात की है कि हम बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि अपनी ताक़त समझें। उन्हें बराबरी का सम्मान दें, उनकी सुरक्षा करें और उनके सपनों को उड़ान दें। क्योंकि जिस समाज में बेटियों की इज़्ज़त होती है, वही समाज तरक्की करता है।
याद रखिए...
बेटियाँ किसी की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि रब की सबसे खूबसूरत अमानत होती हैं। उनकी क़द्र कीजिए, उन्हें प्यार दीजिए, सम्मान दीजिए और उनके सपनों को पूरा करने में उनका साथ दीजिए। यही एक बेहतर समाज और बेहतर इंसान की पहचान है।
"जिस घर में बेटियों की क़द्र होती है, उस घर पर रब की रहमत हमेशा बरसती है।" 🤲❤️
✍️ लेखक: इरफ़ान आलम


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