Successmee2 | Chhattisgarh Latest News | gajendra yadav इस्तीफे की माँग तेज
छत्तीसगढ़ में 12वीं हिंदी पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों में छात्रों ने प्रदर्शन कर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई। इस बीच छात्र संगठन NSUI ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के इस्तीफे की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
छात्रों का प्रदर्शन, NSUI ने दिया समर्थन
पेपर लीक मामले को लेकर कई स्थानों पर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। NSUI के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी छात्रों के साथ धरने में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक की घटनाओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शन कर रहे छात्रों और NSUI कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। उनका कहना है कि बार-बार परीक्षा से जुड़े विवाद सामने आने से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। छात्रों ने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू करने की भी अपील की।
हरिका राव के परिवार को न्याय की मांग
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने री-नीट परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम के बाद आत्महत्या करने वाली हरिका राव के परिवार को न्याय दिलाने की मांग भी उठाई। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग
छात्रों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल परीक्षा प्रणाली ही नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। उनका मानना है कि परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र सुरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में 12वीं हिंदी पेपर लीक मामले ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। छात्रों का विरोध और NSUI का समर्थन इस मुद्दे को राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना रहा है। अब सभी की नजर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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