इक अजीब सी हवा चली इस ज़माने की -eek aajib si hwa chli fiza me es jamane ki
इक अजीब सी हवा चली है, इस फ़िज़ा मे,
जिसे भी पढ़ता हूं,र्दे-ए-दिल लिखता है
चाय की बात, बात ही रह गई
वो रात, रात ही रह गई
मन उनका और तलब मेरी
खैर वो पल, याद ही रह गई
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Bahut hashin hai gav- बहुत हसीन है मेरा गांव
Dil bekarar sahi udas nhi- दिल बेकरार सही उदास नहीं
Bas baith jau aur tera mera hath ho- बस बैठ जाऊ और तेरा मेरा हाथ हो
Yaade sameta kro, baate rhne diya karo-यादे समेटा करो बाते रहने दिया करो
Jangle ka sukha darkat-जंगल का सूखा दरखत
Kaas ki shimat jaati duriya-काश की सिमट जाती दूरिया


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