Maa mai parae kyu jb janm hi teri kok se hoo-माँ मै पराई क्यों,ज़ब जन्म, तेरी ही कोक से हूँ

 



माँ मै पराई क्यों,ज़ब जन्म, तेरी ही कोक से हूँ
माँ मै कैसे राहू उस आँगन मे, जिस आँगन मे,मै तेरी ना हूँ

माँ मै पराई क्यों, ज़ब जन्म, तेरी ही कोक से हूँ,

मुझे भी लौटा दो,वो प्यार का आँगन,जिस अगन मे, मै तेरी ना हूं

माँ मै पराई क्यों, जब जन्म, तेरी ही कोक से हूँ

माँ तूने ही जन्म दिया,चलना सिखाया,फिर भी, मै तेरी ना हूँ

माँ मै पराई क्यों, ज़ब जन्म, तेरी ही कोक से हूँ

माँ विदाई कर के तू रोई क्यों,जिस आगन मे, मै तेरी ना हूँ

माँ मै पराई क्यों, ज़ब जन्म, तेरी ही कोक से हूँ 

जिस आँगन मे जन्म लिया, उस अगन मे,मै तेरी ना हूँ

जिस आँगन की सौगात हूँ मै, उस आँगन मे, मै तेरी ना हूँ

माँ अब तू ही बता, मै पराई क्यों, ज़ब जन्म, तेरी ही कोक से हूं

ये बाबुल का आँगन कैसा,जिस आँगन मे, मै तेरी ना हूँ

माँ मै पराई क्यों, ज़ब जन्म, तेरी ही कोक से हूं


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