क्या देश में ऐसी स्थिति आनी चाहिए कि बच्चों पर लाठीचार्ज हो?
जब भी किसी प्रदर्शन में छात्रों या युवाओं पर बल प्रयोग की खबरें सामने आती हैं, तो पूरा देश भावुक हो जाता है। हर नागरिक के मन में एक ही सवाल उठता है—क्या लोकतंत्र में संवाद की जगह लाठीचार्ज होना चाहिए?
भारत का भविष्य उसके युवा और छात्र हैं। उनकी आवाज़ को सुनना, उनकी समस्याओं का समाधान करना और शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान है। यदि किसी मुद्दे पर मतभेद हैं, तो उनका समाधान कानून, संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।
भारतीय सेना देश की सीमाओं की रक्षा के लिए समर्पित है। वहीं आंतरिक कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से पुलिस और अन्य नागरिक सुरक्षा एजेंसियों की होती है। इसलिए सेना के नाम पर कोई भी अपुष्ट बयान फैलाना उचित नहीं है।
एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें यह अपेक्षा करनी चाहिए कि देश में ऐसा वातावरण बने, जहाँ बच्चों, छात्रों और युवाओं की बात सुनी जाए, और किसी भी पक्ष को हिंसा या बल प्रयोग का सामना न करना पड़े।
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवाद, संवेदनशीलता और न्याय है। यदि हम इन मूल्यों को मजबूत करेंगे, तो देश भी मजबूत होगा और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।
आइए, हम ऐसा भारत बनाने का संकल्प लें जहाँ हर आवाज़ को सम्मान मिले, हर मतभेद का समाधान संवाद से हो और हर बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहे।
जय हिंद।

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