❤️ माँ-बाप की दुआ से बढ़कर कोई दौलत नहीं


— इरफ़ान आलम की कलम से

एक अमीर आदमी के पास हर वह चीज़ थी, जिसकी लोग ख़्वाहिश करते हैं—बड़ा घर, महंगी गाड़ियाँ, दौलत और शोहरत। लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान कहीं खो गई थी और दिल में सुकून नहीं था।



एक दिन उसने एक बुज़ुर्ग से पूछा, "मेरे पास सब कुछ है, फिर भी दिल खाली-खाली क्यों लगता है?"

बुज़ुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, आख़िरी बार अपनी माँ के पास बैठकर उनसे बातें कब की थीं? आख़िरी बार अपने पिता का हाथ पकड़कर उनका हाल कब पूछा था?"

यह सुनकर वह आदमी खामोश हो गया। उसे याद आया कि दुनिया की दौलत कमाने की दौड़ में उसने अपने माँ-बाप की मोहब्बत और दुआओँ को ही पीछे छोड़ दिया था।

वह उसी वक़्त घर पहुँचा। माँ के हाथ चूमे, पिता के गले लग गया और रोते हुए बोला, "अम्मी... अब्बू... मुझे माफ़ कर दीजिए। मैं दुनिया की दौलत कमाने में आपकी दुआओँ की सबसे बड़ी दौलत भूल गया।"

माँ ने काँपते हाथों से उसके सिर पर हाथ रखा और दुआ की, "अल्लाह तुम्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी, बरकत और सुकून अता फ़रमाए।"

उस दिन पहली बार उसे एहसास हुआ कि जिस सुकून की तलाश वह दुनिया भर में कर रहा था, वह तो उसके अपने घर में, माँ-बाप की दुआओँ में छिपा था।

याद रखिए...

दुनिया की दौलत खत्म हो सकती है, लेकिन माँ-बाप की सच्चे दिल से निकली दुआ इंसान की तक़दीर बदल सकती है।

अगर आपके माँ-बाप ज़िंदा हैं, तो उनकी क़द्र कीजिए। उनके साथ बैठिए, उनकी ख़िदमत कीजिए और उनकी दुआएँ लीजिए। यही दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है।

✍️ कलमकार: इरफ़ान आलम
"माँ-बाप की दुआ से बढ़कर कोई दौलत नहीं, और उनकी ख़िदमत से बढ़कर कोई इबादत नहीं।" 🤲❤️
— इरफ़ान आलम की कलम से

एक अमीर आदमी के पास हर वह चीज़ थी, जिसकी लोग ख़्वाहिश करते हैं—बड़ा घर, महंगी गाड़ियाँ, दौलत और शोहरत। लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान कहीं खो गई थी और दिल में सुकून नहीं था।



एक दिन उसने एक बुज़ुर्ग से पूछा, "मेरे पास सब कुछ है, फिर भी दिल खाली-खाली क्यों लगता है?"

बुज़ुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, आख़िरी बार अपनी माँ के पास बैठकर उनसे बातें कब की थीं? आख़िरी बार अपने पिता का हाथ पकड़कर उनका हाल कब पूछा था?"

यह सुनकर वह आदमी खामोश हो गया। उसे याद आया कि दुनिया की दौलत कमाने की दौड़ में उसने अपने माँ-बाप की मोहब्बत और दुआओँ को ही पीछे छोड़ दिया था।

वह उसी वक़्त घर पहुँचा। माँ के हाथ चूमे, पिता के गले लग गया और रोते हुए बोला, "अम्मी... अब्बू... मुझे माफ़ कर दीजिए। मैं दुनिया की दौलत कमाने में आपकी दुआओँ की सबसे बड़ी दौलत भूल गया।"

माँ ने काँपते हाथों से उसके सिर पर हाथ रखा और दुआ की, "अल्लाह तुम्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी, बरकत और सुकून अता फ़रमाए।"

उस दिन पहली बार उसे एहसास हुआ कि जिस सुकून की तलाश वह दुनिया भर में कर रहा था, वह तो उसके अपने घर में, माँ-बाप की दुआओँ में छिपा था।

याद रखिए...

दुनिया की दौलत खत्म हो सकती है, लेकिन माँ-बाप की सच्चे दिल से निकली दुआ इंसान की तक़दीर बदल सकती है।

अगर आपके माँ-बाप ज़िंदा हैं, तो उनकी क़द्र कीजिए। उनके साथ बैठिए, उनकी ख़िदमत कीजिए और उनकी दुआएँ लीजिए। यही दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है।

✍️ कलमकार: इरफ़ान आलम
"माँ-बाप की दुआ से बढ़कर कोई दौलत नहीं, और उनकी ख़िदमत से बढ़कर कोई इबादत नहीं।" 🤲❤️

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