नीट में मासूम बच्चों की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है। लेकिन अगर हम सच का सामना करें, तो लोकतंत्र में सिर्फ नेता ही नहीं, हम वोटर भी अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह बच नहीं सकते।
हर चुनाव में हम अपने वोट से किसी को सत्ता सौंपते हैं। उसी वोट के दम पर सरकारें बनती हैं, नीतियां बनती हैं और फैसले लिए जाते हैं। अगर चुने हुए प्रतिनिधि जनता की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यवस्था पर खरे नहीं उतरते, तो उनसे जवाब मांगना हमारा अधिकार भी है और कर्तव्य भी।
हर बार दुख जताना काफी नहीं है। हमें यह भी सोचना होगा कि वोट देते समय हमने किन मुद्दों को प्राथमिकता दी थी। जाति, धर्म और नारों से ऊपर उठकर अगर हम ईमानदारी, जवाबदेही और काम के आधार पर वोट देंगे, तभी व्यवस्था में बदलाव आएगा।
लोकतंत्र में सरकारें जनता बनाती हैं। इसलिए हर वोट सिर्फ एक अधिकार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की जिम्मेदारी भी है।
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