Supreme Court Judge's Big Remark: 'विरोध करने पर बच्चे जेल भेजे जा रहे हैं, उन्हें बेल तक नहीं मिलती'
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां (Justice Ujjal Bhuyan) ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान लोकतंत्र, विरोध प्रदर्शन और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का मौलिक अधिकार है, लेकिन आज ऐसी स्थिति बनती जा रही है कि विरोध करने वाले छात्रों और युवाओं को जेल भेज दिया जाता है तथा उन्हें आसानी से जमानत (बेल) भी नहीं मिलती।
उन्होंने यह भी कहा कि असहमति (Dissent) लोकतंत्र की आत्मा है और सामान्य गतिविधियों को अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। न्यायमूर्ति भुइयां ने चिंता जताई कि कई मामलों में जमानत मिलने में भी अनावश्यक देरी होती है और कड़ी शर्तें लगाई जाती हैं, जिससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होती है।
यह टिप्पणी किसी अंतिम न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक व्याख्यान के दौरान व्यक्त की गई राय थी। इसे देश में नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्याय व्यवस्था पर चल रही बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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