Musaafir successmee2....मुसाफ़िर.....!
तुझ से दूर क्या बताऊँ मैं कैसे हूँ, तेरे शहर से लौटा इक बे-अज़्म मुसाफ़िर हूँ। काश तू बन जा मेहमां इक दिन मेरे घर में, दिल को संभाले दर पे आँखें बिछाएं हुए हूँ। अगर तू नहीं आ सकता मेरे घर को, अपनी ख़ुशबूएँ भेज मैं इन्तज़ार में सरेराह हूँ। मह-जबीं न कोई हुस्न-ए-आम भाया मुझे, बेगानी हर शय मुझ से मैं बस तेरे ख़्याल में हूँ। छुपाया है मेरा दिल तल्ख़-ए-अय्याम-ए-दर्द तसल्सूल, तेरे इश्क़ का जब जब मैं पैरहन ओढ़ लेता हूँ। इज़्तिराब-ए-गुज़ारिश मुसलसल इरफ़ान इक बार तो ये दिल थाम कह दे मैं तो तेरा हूँ। —𝓘𝓻𝓯𝓪𝓷 ¬🖤 #irfanblackheart #blackheartpoetry #urduhindi_poetry Read more post Bahut hashin hai gav- बहुत हसीन है मेरा गांव Dil bekarar sahi udas nhi- दिल बेकरार सही उदास नहीं Bas baith jau aur tera mera hath ho- बस बैठ जाऊ और तेरा मेरा हाथ हो Yaade sameta kro, baate rhne diya karo-यादे समेटा करो बाते रहने दिया करो Jangle ka sukha darkat-जंगल का सूखा दरखत Kaas ki shimat jaati duriya-काश की सिमट जाती दूरिया E-rab kuchh aisa-ऐ रब कु...