Kaas ki shimat jaati duriya -काश की सिमट जाती दूरिया
अपनी उंगलियां आसमा पे यू फेरती है सितारों से सितारा मिलाकर इक नाम लिख़ती है मेरे लिखे कशीदे रोज -ब -रोज पढ़कर वो मेरी हर इक बात रोज याद करती है काश की सिमट जाती दूरिया इक आवाज़ मे बहुत तड़पती है मुझसे जो इतनी दूर रहती है बातो बातो के एता'अत हम एक दूसरे के लेकिन कभी मुझसे तो कभी उनसे ये दिल -ए -रकावत उलझती है Mr- इरफ़ान ❤ ✨ काश की सिमट जाती दूरियाँ – काश की सिमट जाती दूरियाँ… काश हम उन पलों को फिर से जी सकते, जो कभी हमारे बीच थे। काश हर वो बात जो अधूरी रह गई, पूरा हो जाती। काश हर वह खामोशी, हर वह तन्हाई, हर वह दूरी जो हमारे बीच आई, कभी न आती। हम अक्सर जिन लोगों से दूर होते हैं, उन्हें समझने का मौका खो देते हैं। हम अक्सर उन लम्हों की कद्र नहीं कर पाते, जो छोटे-छोटे पल होते हैं, लेकिन यादों में बहुत बड़े बन जाते हैं। 🌿 रिश्तों की कसक रिश्ते हमेशा पास होने से मजबूत नहीं होते, लेकिन पास होने की चाह और यादों की कसक उन्हें और गहरा बना देती है। काश लोग समझ पाते कि हर दूरियां सिर्फ फिजिकल नहीं होती, कभी-कभी वो दिलों में भी रहती हैं। 🌿 यादों की मिठास वो हँसी, वो बातें, वो पल जो साथ बिताए...